"आपके लिए आज़ादी के क्या मायने है " विषय पर आयोजित कल की परिचर्चा में आपने श्री समीर लाल 'समीर' और श्रीमती रश्मि प्रभा के विचारों से रूबरू हुए ! आज उसे परिचर्चा को आगे बढाते हुए मैं आपको ले चल रहा हूँ दिगंबर नाशवा जी के पास ! आईये उनसे पूछते हैं क्या है उनके लिए आज़ादी के मायने ?

.... पता नही आप स्वतंत्रता दिवस की बात कर रहे हैं या आज़ादी की, इसलिए मैं इस परिचर्चा में दोनो की ही बात करना चाहता हूँ. बचपन में जब कभी स्कूल में झंडा फहराया जाता था तो दिल में इक जोश होता था .. वन्दे-मातरम और देश भक्ति के गीतों से मन में आशा की उमंग दौड़ जाती थी पर समय के साथ साथ बदलते परिवेश ने, बदलती सामाजिक परिस्थिति ने इस दिवस का महत्व खो दिया ... आज इस दिवस का अर्थ है एक और छुट्टी … किसी रस्म अदायगी की तरह टीवी या रेडियो पर राष्ट्रभक्ति गाने सुन कर थोड़ा भावुक होने की कोशिश, अपने भीतर राष्ट्रभक्ति उतारने का जबरन प्रयास लेकिन दूसरे दिन फिर से अपने रूटीन कामों में मस्त. हमारे जीवन में स्वतंत्रता दिवस एक आम छुट्टी की तरह आता है और चला जाता है.

सन ४७ के बाद लोगों में ज़रूर ये भावना रही होगी की वो अँग्रेज़ों की गुलामी से आज़ाद हो गये .... पर यदि आप आज की पीढ़ी से पूछें तो शायद आज़ाद भारत में आज़ादी का मतलब ढूँढने में लंबा समय लगेगा ... आज़ादी किससे .... इस नये उपजे राजतंत्र से, सरकारी तंत्र से, भाई भतीजावाद से, जाति व्यवस्था से, धार्मिक व्यवस्था से या भोगवाद से, स्वार्थ से, अपने उन्मुक्त व्यवहार से या अंधाधुंध रफ़्तार से ...... क्या ५० साल पहले बना संविधान का (जो अधिकतर अँग्रेज़ी सभ्यता का आईना है) देश में अक्षरतः पालन हो तो सही आज़ादी मानी जायगी या सदियों पुरानी परंपराओं का निर्वाह कर पाना आज़ादी मानी जायगी ..... बोलने की आज़ादी हो तो गाली दे कर बात करना आज़ादी मानी जायगी ....

पल पल बदलते परिवेश, बदलती इच्छाओं में शायद इस बात को निश्चित करना आसान नही है कि हमारे लिए आज़ादी के सही मायने क्या है ..... सच पूछो तो मैं भी उन हज़ारों लोगों की तरह आज तक यह निश्चित नही कर पा रहा कि आज़ादी के सही मायने क्या है ....
दिगंबर नासवा

(वर्ष-२०१० के श्रेष्ठ गज़लकार)

http://swapnmere.blogspot.com/

===========================================================

परिचर्चा अभी जारी है, मिलते हैं एक अल्प विराम के बाद ....

6 comments:

  1. सच कहा दिगंबर जी ने आज की पीढ़ी को कुछ लेना देना नहीं इन बातों से ..कल ही किसी कार्यक्रम के दौरान देखा देश के प्रधानमंत्री का नाम तक नहीं मालूम उन्हें.हाँ माइकल जेक्सन कौन था वो सबको पाता था..

    प्रत्‍युत्तर देंहटाएं
  2. बहुत सुन्दर और सार्थक अभिव्यक्ति

    प्रत्‍युत्तर देंहटाएं

आपका स्नेह और प्रस्तुतियों पर आपकी समालोचनात्मक टिप्पणियाँ हमें बेहतर कार्य करने की प्रेरणा प्रदान करती हैं.

 
Top