
एक ऐसा साहित्यकार जो विगत तीस सालों से साहित्य और पत्रकारिता में सक्रिय है . अनेक अखबारों में सह संपादक, मुख्य नगर संवाददाता, और संपादक पद पर सेवाएँ देने के बाद इन दिनों फ्री लान्सिंग. सद्भावना दर्पण नामक एक त्रैमासिक अनुवाद-पत्रिका का प्रकाशन-संपादनकर रहे हैं ..
हिन्दी सेवा के लिए जिन्हें त्रिनिदाद (वेस्ट इंडीज़) में हिंदी सेवाश्री कि उपाधि मिली. व्यंग्य लेखन के लिए भी लखनऊ,लुधियाना, भोपाल आदि अनेक शहरों में सम्मानित किया गया. लगभग दस देशों की यात्राएं. प्रकाशन- ३२ पुस्तकें प्रकाशित. मूलतः व्यंग्यकार. पांच अन्य पुस्तकों में सहयोगी रचनाकार. तीन उपन्यास, आठ व्यंग्य संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं. चौथा उपन्यास ''देवपुर के दानव'' शीघ्र प्रकाश्य. इनके व्यंग्य साहित्य पर अब तक सात लोग शोध कार्य कर चुके हैं. इस वक्त कर्णाटक एवं मध्यप्रदेश में दो लोग पीएच. डी. की उपाधि के लिए गिरीश पंकज के समग्र व्यंग्य साहित्य पर शोध कार्य कर रहे है, पंजाब और उत्तर प्रदेश में दो छात्राएं इनके उपन्यास ''पालीवुड कीअप्सरा'' और ''माफिया'' पर लघु शोध कर रही हैं. डा. सुधीर शर्माके संपादन में प्रकाशित पत्रिका ''साहित्य वैभव'' का विशेषांक '' पचास के गिरीश'' प्रकाशित अनुवाद- इनकी रचनाओं के अनुवाद कन्नड़, तमिल, तेलुगु, उर्दू, सिन्धी, छत्तीसगढ़ी, अंगरेजी, पंजाबी, नेपाली, मराठी, ओडिया आदि भाषाओँ में हो चुके है. व्यंग्य उपन्यास ''मिठलबरा की आत्मकथा'' का ओडिया और तेलुगु अनुवाद इसी साल छप कर आ जाएगा. नई कविता, गीत, ग़ज़ल, कहानी, लघुकथा, साक्षात्कार, संस्मरण, बाल साहित्य, नाटक, नवसाक्षर साहित्य आदि का निरंतर लेखन. सम्प्रति - साहित्य अकादेमी, दिल्ली के सदस्य, छत्तीसगढ़ राष्ट्रभाषा प्रचार समिति के प्रांतीय अध्यक्ष तथा सर्वोदय मंडल के प्रांतीय महामंत्री. कुछ अखबारों में नियमित रूप से स्तम्भ-लेखन से जुड़े हैं ...!
जहां तक चिट्ठाकारी का प्रश्न है, ये हिंदी चिट्ठाकारों को अपने सात्विक लेखन से सदैव उत्प्रेरित करने का कार्य करते रहते है !
जानते हैं कौन हैं वो ?
वो हैं श्री गिरीश पंकज
जिन्हें ब्लोगोत्सव की टीम ने वर्ष के श्रेष्ठ ब्लॉग विचारक का अलंकरण देते हुए सम्मानित करने का निर्णय लिया है

नई दिल्ली से सुषमा सिंह की एक विस्तृत रपट रविवार दिनांक 8 मई 2011 के दैनिक जनसंदेश टाइम्स, लखनऊ में पेज 19 पर प्रकाशित।


































20 comments:
पंकज भाई को हार्दिक बधाई।
…………..
स्टोनहेंज के रहस्यमय पत्थर।
क्या यह एक मुश्किल पहेली है?
are waah kal hi maine unki ek pustak ..pollywood ki apsra ..yahan ki library men dekhi ..jahir hai fir padi bhi :) aur aaz unhen wish karne ka mauka mil gaya .
bahut abhut abdhai Girish Pankaj ji ko.
गिरीश पंकज जी को बधाई
गिरीश पंकज जी को हार्दिक बधाई।
गिरीश जी के बारे में काफी कुछ जानने को मिला। आभार एवं बधाई।
गिरीश पंकज जी को बधाई !
गिरीश पंकज जी को बधाई ...!
गिरीश पंकज जी को हार्दिक बधाई।
गिरीश भैया को ढेरे सारी शुभकामनाएं
बधाई, कल आकर खानी है मिठाई।
nice
बहुत बहुत बधाई हो पंकज जी को .........असल में तो ये सम्मान देकर परिकल्पना महोत्सव स्वयं ही सम्मानित हुआ है । एक बार पुन: मुबारकबाद गिरिश भाई को
गिरीश पंकज जी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ.
badhaai
बधाई हो।
दिन भर व्यस्त रहने के बाद अभी हाज़िर हुआ हूँ. मुझे ''परिकल्पना'' ने किसी लायक समझा, इस हेतु रविन्द्र जी और उनकी टीम का आभार..इसका मतलब यह हुआ कि, लोगों कि मुझ पर नज़र है. मुझे और ज़िम्मेदार हो कर अपना काम करना है. आपका स्नेह बना रहे, बस, यही चाहता हूँ.कुछ अच्छा सोच सकूं, कर सकूं, यही ख्वाहिश है.
आदरणीय गिरीश जी को सम्मानित कर वो नहीं बल्कि ये सम्मान ही लसा है..
बहुत बहुत बधाई और शुभकामनाएँ
प्रमोद ताम्बट
भोपाल
गिरीश जी को हार्दिक बधाई ...
गिरीश पंकज जी को बधाई
गिरीश जी की लेखन साधना को नमन, बहुत बहुत बधाई...
रवींद्र भाई और ब्लॉगोत्सव टीम का आभार...
जय हिंद...
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