एक ऐसा उदीयमान लेखक और व्यंग्यकार जब सृजन के लिए कलम उठाता है तो जग के कंटीले करील-कुंजों को प्रयाग की पावनता प्रदान कर देता है ....!"वसुधैव कुटुंबकम" तक जाकर क्षितिज को भी अपनी बांहों के घेरे में भर लेने की प्रचेष्टा जिसकी रचनाओं में पूरी तरह प्रतिविंबित होती है और जो साहित्य की विभिन्न विधाओं से जन कल्याण के साथ ही साथ जग कल्याण करता है ...!
जानते हैं कौन है वो?
वो है बहुचर्चित युवा लेखक व् व्यंग्यकार श्री दीपक मशाल
जिन्हें ब्लोगोत्सव-२०१० की टीम ने इस बार वर्ष के श्रेष्ठ परिचर्चा लेखक का खिताब देते हुए लोकसंघर्ष परिकल्पना सम्मान से सम्मानित करने का निर्णय लिया है !

नई दिल्ली से सुषमा सिंह की एक विस्तृत रपट रविवार दिनांक 8 मई 2011 के दैनिक जनसंदेश टाइम्स, लखनऊ में पेज 19 पर प्रकाशित।





























17 comments:
बधाई हो।
बहुत उम्दा निर्णय ..
बहुत बहुत बधाई दीपक.
are waah...........aashirwaad
badhaee!
मशाल को जब सम्मान दिया जाए तो मेरी संस्तुति है कि शाल भी ओढ़ाई जाए, तभी दीपक मशाल नाम सार्थक होगा।
आपकी संस्तुति पर मेरी सहमति है अविनाश जी !
दीपक भाई, हार्दिक बधाई।
………….
ये ब्लॉगर हैं वीर साहसी, इनको मेरा प्रणाम
बहुत उम्दा निर्णय ..
बहुत बहुत बधाई दीपक...!
aapko bahut badhai deepak ji...!
दीपक जी को बधाई .. आपको धन्यवाद !!
बहुत बहुत बधाई एवं हार्दिक शुभकामनाएँ..दीपक भाई को
शाल के साथ श्री फल?
nice
Ravindr jee, Avinaash jee ke saath Sameer jee ke sujhav par amal hona chahiye.
Deepak ko meree bahut-bahut shubhkaamanaayen.
दीपक को अनेकों बधाइयाँ
बंधाई स्वीकारें ..
Badhai..........Deepak jee!!
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