हिंदी चिट्ठाजगत से जुडा एक ऐसा लेखक जो अपनी माटी , अपनी सभ्यता-संस्कृति और आंचलिक लोक कलाओं को आयामित करने की दिशा में विगत कई वर्षों से सक्रिय है ।एक ऐसा लेखक जब अपनी सांस्कृतिक विरासत के गुणों और विशेषताओं को प्रस्तुत करता है तो हर भारतीयों का सीना गर्व से फूल जाता है ।
जानते हैं कौन हैं वो ?
वो हैं छतीसगढ़ की माटी में लोटा-लोटा कर जवान हुआ एक ऐसा लेखक जो जीता है तो छातिसगढ़ी संस्कृति के लिए और लिखता है तो छतीसगढ़ी संस्कृति को अक्षुण बनाए रखने के लिए ....!
नाम है संजीव तिवारी
जिन्हें ब्लोगोत्सव की टीम ने वर्ष के श्रेष्ठ क्षेत्रीय लेखक का खिताब देते हुए इस बार लोकसंघर्ष परिकल्पना सम्मान से सम्मानित करने का निर्णय लिया है ।
विस्तृत जानकारी के लिए यहाँ किलिक करें

नई दिल्ली से सुषमा सिंह की एक विस्तृत रपट रविवार दिनांक 8 मई 2011 के दैनिक जनसंदेश टाइम्स, लखनऊ में पेज 19 पर प्रकाशित।





























19 comments:
बहुत बहुत बधाई।
संजीव जी को बहुत बहुत बधाई.
संजीव जी को हार्दिक बधाईयाँ।
………….
संसार की सबसे सुंदर आँखें।
बड़े-बड़े ब्लॉगर छक गये इस बार।
संजीव जी को बहुत बहुत बधाई.
बहुत-बहुत बधाई
संजीव जी को बहुत बहुत बधाई.
बहुत बहुत बधाई.
मेरी भी बधाई स्वीकार कर लें!
छत्तीसगढ ब्लागर्स के चहेते भाई संजीव तिवारी को हार्दिक शुभकामनाएं।
गाड़ा गाड़ा बधई
बहुत बहुत बधाई।
nice
संजीव को बधाई. वो इसके लायक है. उसने जो काम किया है, वह सबके सामने है. ऐसे सम्मान अच्छे लगते है, जो बिना किसी जोड़तोड़ के मिले. संजीव का काम देखकर ही हमारी संस्था ने गत वर्ष उसे ''राष्ट्रभाषा अलंकरण'' दिया था. अब ''परिकल्पना'' द्वारा सम्मान मिला है, तो मुझे ख़ुशी हो रही है, की हमने एक सही व्यक्ति का चयन किया था. बधाई, संजीव... धन्यवाद प्रभातजी, ऐसे स्तरीय चयनों के लिए भी
लोक संघर्ष पत्रिका, रविन्द्र भाई सहित लखनउ ब्लॉगर्स एसोसियेशन के सभी सदस्यों एवं टिप्पणीकर्ताओं का मै हृदय से आभारी हूं. आप सबने मुझे स्नेह व सम्मान दिया इसके लिए बहुत बहुत धन्यवाद।
संजीव सदा सजीव रहते हैं।
संजीव हैं तो उनकी रचनायें तो सजीव रहेंगी ही। मेरे प्रेरणा स्रोत भाई संजीव को हार्दिक बधाई एवम ढेरों शुभकामनायें।
संजीव जी को बहुत बहुत बधाई
बहुत बधाई संजीव जी...!
बहुत बहुत बधाई।
संजीव जी को बहुत बहुत बधाई
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