श्री राम नरेश त्रिपाठी की बाल कविता के बाद
सुप्रसिद्ध गीत-गज़लकार
श्री रोहिताश्व अस्थाना की एक बाल कविता
फूल बनकर मुस्कराना चाहिए
की कुछ पंक्तियाँ
प्रस्तुत कर रहा हूँ-
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रात-दिन आँसू बहाने से भला,
फूल बनकर मुस्कराना चाहिए।
चाट का ठेला खड़ा है सामने,
आज कुछ खाना-खिलाना चाहिए।
आ गया इतवार, पापा जी हमें,
आज तो सरकस घुमाना चाहिए।
एक सीमा तक करें शैतानियाँ,
ना किसी का दिल दुखाना चाहिए।
मास्टरजी हम पढ़ेंगे शौक से,
पर खिलौने कुछ दिलाना चाहिए।
देश को खुशहाल रखना है अगर,
हमको संसद में बिठाना चाहिए।
-रोहिताश्व अस्थाना
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इस बाल कविता के बाद मैं आपको ले चल रहा हूँ कार्यक्रम स्थल की ओर जहां अजित कुमार मिश्र उपस्थित हैं अपनी दो कविताओं के साथ ......यहाँ किलिक करें
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इसी के साथ मैं जाकिर अली रजनीश आपसे विदा ले रहा हूँ , कल अवकाश का दिन है उपस्थित होते हैं परसों यानी दिनांक - २८.०५.२०१० को प्रात: ११ बजे परिकल्पना पर

नई दिल्ली से सुषमा सिंह की एक विस्तृत रपट रविवार दिनांक 8 मई 2011 के दैनिक जनसंदेश टाइम्स, लखनऊ में पेज 19 पर प्रकाशित।





































4 comments:
Sundar.
भावपूर्ण और सार्थक सन्दर्भों से युक्त
बहुत सुंदर कविता
बाल कविताओं की यह प्रस्तुति सुन्दर रही ! आभार ।
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