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शुक्रवार, 30 अप्रैल 2010

ब्लोगोत्सव-२०१० : बच्चे भी तो बेरौनक जगह जाना नही चाहते ना अब

भई, अबके गर्मियों की छुट्टियों मे हिंदुस्तान मे ही कहीं चलेंगे। परदेस चलने का कुछ मूड नहीं बन रहा!"
सुबह बाथरूम मे खड़ा विपुल शेव करते करते अपनी पत्नी नीरा से बतियाने लगा। कुछ देर उसकी प्रतिक्रिया का इंतज़ार कर फिर आगे बोल पडा ,"सोंचता हूँ,पहले तो शिमला चल पड़ें ,फिर आगे की देखी जायेगी। वैसे तो घिसी पिटी जगह है, गर्मियों मे भीड़ भी रहेगी ,लेकिन बच्चे भी तो बेरौनक जगह जाना नही चाहते ना अब!"





ये अंश शमा की कहानी नीले-पीले फूल के हैं .....शमा एक वेहद संवेदनशील कथाकारा हैं , आज श्रेष्ठ कहानियों की श्रृंखला में इनकी कहानी को शामिल करते हुए मुझे वेहद ख़ुशी हो रही है ....विस्तार से कहानी पढ़ने के लिए यहाँ किलिक करें



जारी है उत्सव, मिलते हैं एक अल्पविराम के बाद 

3 comments:

पूर्णिमा ने कहा…

शुभकामनाओं के साथ,

mala ने कहा…

यह उत्सव उस सोपान को प्राप्त कर लिया हैं जहां हर किसी की परिकल्पना नहीं पहुँचती है .....शुभकामनाओं के साथ !

गीतकार /geetkaar ने कहा…

मेरी ढेर सारी शुभकामनाएं !

परिकल्पना सम्मान-२०१०

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