शुक्रवार, 30 अप्रैल 2010
ब्लोगोत्सव-२०१० : आपको इंतज़ार था, लीजिये हम आ गए .........!
गर्म हवा के झोंके उदंडता पर उतारू होकर खिड़की किवाड़ पीट रहे थे ! पिघलती धूप में प्यासे कौवे की काँव काँव में घिघिआहट भरा विलाप शामिल था . मैं घर के काम-धाम से निबटकर हवा की झाँय-झाँय , सांय- सांय को अन्दर तक महसूसती अपने कमरे में लेटने की सोच ही रही थी कि गेट खुलने की आवाज़ आई .
उफ़ ! कौन होगा अभी ... सोच ही रही थी कि एक परिचित हांक कानों में आई- मूढ़ी है . आवाज़ ऐसी जैसे कह रही हो - आपको इंतज़ार था, लीजिये हम आ गए .........!
ये अंश कविवर पन्त की मानस पुत्री श्रीमती सरस्वती प्रसाद की कहानी मुढीवाला के हैं, विस्तार से पढ़ने के लिए.............. यहाँ किलिक करें
उत्सव जारी है, मिलते हैं एक अल्पविराम के बाद
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ब्लोगोत्सव-२०१०

नई दिल्ली से सुषमा सिंह की एक विस्तृत रपट रविवार दिनांक 8 मई 2011 के दैनिक जनसंदेश टाइम्स, लखनऊ में पेज 19 पर प्रकाशित।



































3 comments:
एक गंभीर कहानी और उसमें सन्निहित सन्देश के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद !
बहुत खूब, बहुत सुन्दर ....पढ़कर आनंद आ गया !
अति सुन्दर प्रस्तुति ...आभार !
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