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सोमवार, 26 अप्रैल 2010

हम लेकर आये हैं आज निर्मला जी की कुछ और गज़लें

ग़ज़ल अरबी साहित्य की प्रसिद्ध काव्य विधा है जो बाद में फ़ारसी, उर्दू, और हिंदी साहित्य में भी बेहद लोकप्रिय हुइ। संगीत के क्षेत्र में इस विधा को गाने के लिए इरानी और भारतीय संगीत के मिश्रण से अलग शैली निर्मित हुई। हिंदी के अनेक रचनाकारों ने इस विधा को अपनाया। जिनमें निराला, शमशेर, बलबीर सिंह रंग, भवानीशंकर, जानकी वल्लभ शास्त्री, सर्वेश्वर दयाल सक्सेना, त्रिलोचन आदि प्रमुख हैं। किंतु इस क्षेत्र में सर्वाधिक प्रसिद्धि दुष्यंत कुमार को मिली।



हिंदी ब्लॉगजगत में वैसे तो अनेक गज़लकार हिंदी में ग़ज़ल कह रहे हैं जिसमें प्रमुख हैं निर्मला कपिला, नीरज गोस्वामी, सर्बत एम् जमाल, गौतम राजरिशी, श्यामल सुमन, अर्श आदि . आज का उत्सव  पूरी तरह  ग़ज़ल पर केन्द्रित है ....

अभी आप ने ग़ज़ल की विकास यात्रा पर एक मुकम्मल आलेख पढ़ा और अब हम आपको मिलबा रहे हैं हिंदी चिट्ठाकारी में अपनी सार्थक उपस्थिति दर्ज कराने वाले प्रमुख गज़लकार श्रीमती निर्मला कपिला, नीरज गोस्वामी, गौतम राजरिशी, श्यामल सुमन और अर्श से, लेकिन उससे पहले आईये आज के इस ग़ज़ल उत्सव का आगाज़ करते हैं निर्मला जी की एक ग़ज़ल से जिसे स्वर दिया है सुनील सिंह डोगरा ने-



इसके अतिरिक्त हम लेकर आये हैं-
 इस उत्सव में निर्मला जी की कुछ और गज़लें ......यहाँ किलिक करें


उत्सव जारी है मिलते हैं एक अल्पविराम के बाद

5 comments:

mala ने कहा…

....इतनी उत्कृष्ट रचनाएँ पढ़ने को मिल रही है की टिपण्णी करना हम भूल जा रहे हैं ....आनंद आ गया इस उत्सव में शामिल होकर !

पूर्णिमा ने कहा…

प्रयास सराहनीय है !

Mrs. Asha Joglekar ने कहा…

सुंदर प्रस्तुति ।

Udan Tashtari ने कहा…

आनन्द आ गया..बहुत उम्दा प्रस्तुति!!

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" ने कहा…

खूबसूरत ग़ज़ल और उसपे इतना सुन्दर तरन्नुम ... मज़ा आ गया !

हिंदी ग़ज़ल की विकास यात्रा पर रवीन्द्र प्रभात का एक समग्र आलेख

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