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बुधवार, 28 अप्रैल 2010

रहस्य: हम किसी चीज़ को किसी जगह पर देखते हैं तो वह वास्तव में ‘उस जगह’ पर नहीं होती

बीसवीं सदी की शुरुआत में महान वैज्ञानिक अलबर्ट आइंस्टीन ने एक थ्योरी पेश की जिसका नाम था, ‘सापेक्षता का सिद्धान्त (Theory of relativity)। इस थ्योरी के अनुसार ब्रह्माण्ड में कुछ भी रुका हुआ नहीं है। सभी एक दूसरे के सापेक्ष (Relative) चल रहे हैं। इसका मतलब ये है कि जब हम किसी चीज़ को किसी जगह पर देखते हैं तो वह वास्तव में ‘उस जगह’ पर नहीं होती। मिसाल के तौर पर हम आसमान में एक तारा देखते हैं। वह तारा वास्तव में करोड़ों प्रकाश वर्ष (Light Year) दूर होता है। यानि उस तारे से हमारी आँखों तक रौशनी आने में करोड़ों साल लगे। स्पष्ट है कि हम उस तारे की करोड़ों साल पहले की पोजीशन देख रहे हैं।





उत्सव जारी है मिलते हैं एक अल्प विराम के बाद

3 comments:

RAJNISH PARIHAR ने कहा…

विज्ञानं के अनुसार तो यही सच है....

संगीता पुरी ने कहा…

ब्‍लोगोत्‍सव में विज्ञान के विषय में भी पढना जानना अच्‍छा लगा !!

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

बड़ा गूढ़ विषय उठा लिया है ।

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