एक ऐसी ई-पत्रिका जिसमें  आप साहित्य ,संस्कृति और सरोकार से एकसाथ रूबरू होते हैं . जहां आपकी सदिच्छा के अनुरूप सामग्रियां मिलती है. जो आपकी सृजनात्कता को पूरे विश्व की सृजनात्मकता से जोड़ने को सदैब प्रतिबद्ध रहती है.              अपनी रचनाएँ इस ई-मेल पर भेजें :
परिकल्पना पर आपका स्वागत है , पधारने के लिए धन्यवाद !

लेखकों से अनुरोध

परिकल्पना पर लिखने वाले लेखकों से अनुरोध है कि जो भी पोस्ट यहाँ पर लिखें,विस्तृत हो,सारगर्भित हो। अपने ब्लॉग पर प्रकाशित पोस्ट का लिंक यहाँ ना लगाएँ,ऐसा करने पर मजबूरन उन्हें हटाना पड़ेगा।

बुधवार, 28 अप्रैल 2010

ब्लोगोत्सव-२०१० : बहुत कठिन है डगर पनघट की.....

कुछ ही दिन पूर्व एक विद्वान् लेखक का शोधपूर्ण तकनीकी लेख पढ़ा. “बहुत कठिन है डगर पनघट की”. इस लेख में पाँच तकनीकी बाधाओं का उल्लेख करते हुए यह सिद्ध करने का प्रयास किया गया था कि इन समस्याओं का हल निकाले बिना हिंदी को इंटरनेट पर लाने के अब तक के तमाम प्रयासों समेत भविष्य के भी प्रयास प्रभावकारी नहीं हो   सकेंगे . निश्चय ही यह स्थिति कुछ वर्ष पूर्व सही थी, लेकिन अब कंप्यूटर, इंटरनेट और ई-मेल के क्षेत्र में होने वाली नित नई खोज से ऐसा लगने लगा है कि अब कठिन नहीं रही डगर हिंदी इंटरनेट की........

() यह जानकारी दे रहे हैं श्री विजय के मह्लोत्रा ......यहाँ किलिक करें


आज सातवें दिन की संपन्नता की ओर बढ़ते हुए आज हम अमर शहीद  भगत सिंह की सहादत के ७५ वर्ष पूरे होने पर एक दस्तावेज प्रकाशित कर रहे हैं......यहाँ किलिक करें

=====================================================================
इसी के साथ आज का कर्यक्रम संपन्न, कल उत्सव के लिए अवकाश का दिन है ...इसलिए हम अब दिनांक ३०.०४.२०१० को पुन: उपस्थित होंगे प्रात: ११ बजे परिकल्पना पर ....लेकर 20 वीं शताब्दी के आठवें दशक में अपने पहले ही कविता संग्रह 'रास्ते के बीच' से चर्चित हो जाने वाले आज के सुपरिचित हिंदी कवि दिविक रमेश का साक्षात्कार . साथ ही श्रीमती सरस्वती प्रसाद,रवि रतलामी, निर्मला कपिला, रश्मि रविजा आदि की कहानियाँ .....इसके अतिरिक्त और भी बहुत कुछ !
======================================================================

3 comments:

संगीता पुरी ने कहा…

आपके विचारों की 'परिकल्‍पना' के द्वारा की गयी ब्‍लोगोत्‍सव 2010 की परिकल्‍पना सुदर यथार्थ में बदलती जा रही है .. पहले दिन से ही मैं इसका आनंद लेती जा रही हूं .. आज के सफलतापूर्ण संपन्‍नता पर आपको ढेरो बधाई .. आगे भी इंटरनेट के हिंदी पाठकों के लिए यह कुशलतापूर्वक ज्ञान , कला और साहित्‍य का भंडार लेकर उपस्थित होती रहेगी .. इसके लिए शुभकामनाएं !!

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ ने कहा…

Haardik Shubhkaamnaayen.

Arvind Mishra ने कहा…

परिकल्पना वजूद में आयी ही नहीं ,शिखर छू रही है

हिंदी ग़ज़ल की विकास यात्रा पर रवीन्द्र प्रभात का एक समग्र आलेख

हिंदी ग़ज़ल की विकास यात्रा पर रवीन्द्र  प्रभात का एक समग्र आलेख

परिकल्पना सम्मान-२०१०

परिकल्पना सम्मान-२०१०

LATEST:


लोकसंघर्ष परिकल्पना सम्मान-२०१०

Product Cloud