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लेखकों से अनुरोध

परिकल्पना पर लिखने वाले लेखकों से अनुरोध है कि जो भी पोस्ट यहाँ पर लिखें,विस्तृत हो,सारगर्भित हो। अपने ब्लॉग पर प्रकाशित पोस्ट का लिंक यहाँ ना लगाएँ,ऐसा करने पर मजबूरन उन्हें हटाना पड़ेगा।

शनिवार, 17 अप्रैल 2010

ब्लोगोत्सव-२०१०: आज के कार्यक्रम का समापन


अदा जी के काव्य पाठ के बाद अब बारी है कवियित्री रश्मि प्रभा की कविता का आनंद लेने की तो आईये रश्मि प्रभा जी के -काव्य पाठ का आनंद लेते हैं .




श्रेष्ठ पोस्ट श्रृंखला के अंतर्गत पढ़िए आज श्री ज्ञान दत्त पाण्डेय जी के मानसिक हलचल पर दिनांक २५.०१.२०१० को प्रकाशित पोस्ट -पगली ...यहाँ किलिक करें


कुछ लोग ऐसे होते हैं जिनका जीवन तो महान होता है किन्तु विचार महान नहीं होते ....वहीं कुछ लोग ऐसे होते हैं जिनके विचार महान होते हैं पर जीवन महान नहीं होता .....मगर जिसके जीवन और विचार दोनों महान हो उसे आप क्या कहेंगे मानव या .....कुछ और ....जी हाँ हमारे हिंदी ब्लॉग जगत में ऐसे सर्जक मौजूद हैं जिनपर हमें गर्व है .....जानना चाहेंगे आप कि वह कौन है.....यहाँ किलिक करें


और अब आईये आचार्य संजीव वर्मा सलिल के द्वारा रचित इस उत्सव गीत के साथ हम आज के कार्यक्रम के समापन की घोषणा करते हैं ....कल अवकाश का दिन है इसलिए हम पुन: उपस्थित होंगे दिनांक १९ .०४.२०१० को प्रात:११ बजे परिकल्पना पर ......उत्सव गीत के लिए यहाँ किलिक करें

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आज की दो महत्वपूर्ण चिट्ठियां


()
सबसे पहले प्रभात जी को बहुत बहुत बधाई इस माहौल को बनाने और कायम रखने के लिए... ब्लॉग महोत्सव ... अहा क्या बात है ... बहुत सारी बातें देखने और सिखाने को मिल रही हैं...अहा गुरु भाई रवि आपने क्या भूमिका लिखी है वाह क्या बात है , ये नया चेहरा देख दिल ख़ुशी से करोडो दाद दे रहा है ... गुरु जी के इस कविता के लिए कुछ भी नहीं कह पाउँगा..ऐसे चमत्कार , कशिश भरी आवाज़ , और उन्तानी ही खूबसूरती से अदायगी ... किसी भी महफ़िल की ज़मानत हैं ये .. यही कहूँगा ... गुरु जी को सादर प्रणाम ....आप का अर्श

()
आदरणीय रविन्द्र जी,
सादर नमस्कार,

 परिकल्पना ब्लाग उत्सव का शुभारंभ देख कर मैं हर्षित हुँ।तथा आशान्वित हुँ कि परिकल्पना के माध्यम से उत्कृष्ट रचनाएं पढने मिलेंगी। यह उत्सव ब्लाग जगत के इतिहास में अवश्य ही मील का पत्थर साबित होगा।मेरी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।
ललित शर्मा
अभनपुर , जिला रायपुर
(छत्तीसगढ)
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इसके साथ ही आज के कार्यक्रम का समापन हो रहा है .....कल अवकाश का दिन है ....मिलते हैं पुन: दिनांक १९.०४.२०१० को परिकल्पना पर प्रात: ११ बजे ....तबतक के लिए शुभ विदा !

4 comments:

Arvind Mishra ने कहा…

वाह ,परिकल्पना की पंखुड़िया छतरा उठी हैं !

Udan Tashtari ने कहा…

परिकल्पना उत्सव ने पूरा माहौल उत्सवनुमा बना दिया है. आनन्द ही आनन्द आया हर लिंक पर जाकर. कविताएँ और गीत सुनकर. रविन्द्र भाई का जितना आभार कहा जाये, कम है. एक उत्कृष्ट आयोजन.

अविनाश वाचस्पति ने कहा…

यह समापन नहीं

संपन्‍नता है

प्रत्‍येक दिन संपन्‍न।


समापन मत कीजिएगा

अब से किसी भी दिन।

निर्मला कपिला ने कहा…

मुझे गर्व है कि मै भी इस उत्सव का एक अंश हूँ रवीन्द्र जी को बहुत बहुत बधाई और शुभकामनायें

हिंदी ग़ज़ल की विकास यात्रा पर रवीन्द्र प्रभात का एक समग्र आलेख

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