इसबार हिन्दी चिट्ठा विश्लेषण कुछ नए तरीके से करने की मेरी इच्छा हुयी । मैंने सोचा कि हरबार इसे प्रस्तुत करने के कुछ नए-नए तरीके ईजाद किये जाएँ ताकि पाठकों की अभिरुचि बनी रहे ।

वर्ष-२००७ में हिन्दी चिट्ठा विश्लेषण छंदबद्ध प्रस्तुत किया गया था , जिसे आप सभी ने काफी सराहा । वर्ष-२००८ में यह विश्लेषण नए -पुराने चिट्ठों की विशेषताओं के वर्गीकरण पर केन्द्रित था , जिसके अर्न्तगत हर विधाओं का अलग-अलग वर्गीकरण करते हुए महत्वपूर्ण चिट्ठों का दस्तावेज आपके सामने रखा गया ।
साथ ही वर्ष-२००८ में हिन्दी चिट्ठा क्रान्ति के अग्रदूत और नए चिट्ठाकारों के लिए प्रेरणा के प्रकाश पुंज रहे शब्दावली में अग्रणी , सकारात्मक टिपण्णी में अग्रणी ,साफ़गोई में अग्रणी, विज्ञान में अग्रणी ,व्यंग्य में अग्रणी ,हास्य में अग्रणी ,तकनीकी पोस्ट में अग्रणी ,सामुदायिक गतिविधियों में ,कानूनी सलाह में अग्रणी ,सिनेमा संवंधित फीचर में अग्रणी,चिंतन में अग्रणी ,विनम्र शैली में अग्रणी, क्षेत्रीय भाषा भोजपुरी ,सकारात्मक प्रतिक्रया में अग्रणी,सकारात्मक सोच में अग्रणी ,तकनीकी सृजन में अग्रणी,शिक्षा- दीक्षा में अग्रणी, ज्योतिष में अग्रणी,प्रशंसा -प्रसिद्धि में अग्रणी,सामयिक सोच -विचार में अग्रणी चिट्ठाकारों का उल्लेख करते हुए एक बेंचमार्क सर्वे प्रस्तुत किया गया था,जिसे आप सभी ने काफी सराहा !लो कर लो बात... मैं फिर आ गया वर्ष -२००९ के अपने पसंदीदा चिट्ठों को लेकर ...!

इसकी प्रस्तुति में पिछले दो विश्लेषणों से कुछ अलग हटकर महसूस होगा,ऐसा मेरा विश्वास है ...!
पूरे वर्ष भर की गतिविधियों पर नज़र रखते हुए उसका शुक्ष्म विश्लेषण काफी दुरूह भरा कार्य होता है.इसीलिए मैं विगत दो माह से अपने ब्लोग परिकल्पना पर कोंई पोस्ट लेकर नहीं आ सका , जिसका मुझे खेद है!

हिंदी चिटठा विश्लेषण -२००९ प्रस्तुत करने से पूर्व मैं यहाँ स्पष्ट कर देना चाहता हूँ की इस श्रृंखला में जिन चिट्ठों के बारे में चर्चा होगी और चिट्ठों की जिन खुबिओं की चर्चा होगी वह विल्कुल मेरी व्यक्तिगत राय के अनुसार होगी , जिसमें किसी के लिए दुराग्रह का कोंई स्थान नहीं होगा . जो भी बातें होगी मेरी व्यक्तिगत राय के आधार पर होगी और उन्ही चिट्ठों को स्थान दिया जाएगा जिस पर मेरी नजरें जायेगी . हो सकता है मेरे संज्ञान में न होने के कारण कोंई अच्छा चिटठा इस चर्चा से वंचित रह जाये, इसलिए आपसे मेरी गुजारिश है की इस विश्लेषण को प्रमाणिक न माना जाये ....!

आईये इस ब्लॉग वार्ता की शुरुआत एक ऐसे ब्लॉग से करते हैं जो हिंदी साहित्य का संवाहक है और हिंदी को समृद्ध करने की दिशा में दृढ़ता के साथ सक्रिय है .वैसे तो इसका हर पोस्ट अपने आप में एक महत्वपूर्ण दस्तावेज़ होता है , किन्तु शुरुआत करनी है इसलिए २० जून -२००९ के एक पोस्ट से करते हैं।


हिंदी युग्म के साज़ -ओ-आवाज़ के सुनो कहानी श्रंखला के अर्न्तगत प्रकाशित हिंदी के मूर्धन्य कथाकार मुंशी प्रेमचंद की कहानी इस्तीफा से ....!

मुंशी प्रेमचंद की यह कालजयी कहानी जब भी पढ़ी जाये,वर्त्तमान के इर्द-गिर्द घूमती दिखाई देती है . कहा गया है कि भूत अथवा भविष्य कभी रूपांतरित नहीं होता केवल वर्त्तमान ही रूपांतरित होता है , इस कहानी को पढ़ने के बाद आप इस धारणा से अवश्य मुक्त हो जायेंगे मेरा दावा है ..!

हर शनिवार को आवाज़ पर प्रेमचंद की एक नयी कहानी सुनने को मिलती है , मैं तमाम व्यस्तताओं के बावजूद एक न एक बार अवश्य सुनने की कोशिश करता हूँ क्योंकि ये कहानियां समाज का आईना है।

इस कहानी में प्रेमचंद का कहना है, कि-"बेचारे दफ्तर के बाबू को आप चाहे ऑंखे दिखायें, डॉँट बतायें, दुत्कारें या ठोकरें मारों, उसक माथे पर बल न आयेगा। उसे अपने विकारों पर जो अधिपत्य होता हे, वह शायद किसी संयमी साधु में भी न हो। संतोष का पुतला, सब्र की मूर्ति, सच्चा आज्ञाकारी, गरज उसमें तमाम मानवी अच्छाइयाँ मौजूद होती हें। "

मुंशी प्रेमचंद की कहानी "इस्तीफा"को स्वर दिया है अनुराग शर्मा ने। इस कहानी को वेहतर तरीके से प्रस्तुत करने हेतु श्री अनुराग को मेरी कोटिश: बधाईयाँ !

इस्तीफा पर बहुत ही सुन्दर व्यंग्य हमारे शहर लखनऊके प्रसिद्द व्यंग्यकार पद्मश्री के. पी. सक्सेना ने भी लिखा है , जिसमें उन्होंने कहा है कि-" हमारा देश एक इस्तीफा प्रधान देश हैं।साल भर में जितने बेकारों की नौकरियां नहीं लगती , उससे ज्यादा नकारे इस्तीफा दे देते हैं।हमारे देश में अनाज की दो फसलें होती है - रबी और खरीफ ... राजनीति की भी दो फसलें होती है- शपथ और इस्तीफा ...पहले शपथ फिर इस्तीफा ....फिर शपथ फिर इस्तीफा . भरती और छंटनी का यह सांस्कृतिक कार्यक्रम पूरे वर्ष चलता रहता है और यह यह देश अपना भूखा पेट बजा कर इसे देखता रहता है !"
" ....... कुल मिलाकर ऐ शाह जी, इस देश के एक अरब ( से भी ज्यादा ) कीडे -मकोडे इन्ही शपथ और इस्तीफों का कागज चाट-चाट कर और ९० रुपये किलो की अरहर की दाल पी-पीकर जिन्दा है . एक उम्मीद पर कि कल फिर शपथ रुपी मम्मी आयेगी , नए खिलौने लाएगी ....!"

यदि आप भी अपनी मनपसंद कहानियों, उपन्यासों, नाटकों, धारावाहिको, प्रहसनों, झलकियों, एकांकियों, लघुकथाओं को अपनी आवाज़ देना चाहते हैं तो यहाँ संपर्क करें, हम मिलते हैं एक अल्प विराम के बाद ....

19 comments:

  1. बढ़िया विश्लेष्ण किया है वाकई आवाज़ बहुत बढ़िया ब्लॉग है .

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  2. आपकी इस महत्वपूर्ण श्रृंखला की समस्त कड़ियों का बेसब्री से इंतजार है ......

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  3. आ गये एक इन्तजार के बाद...सुनाते चलें. अनेक शुभकामनाएँ.

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  4. आपके मेहनत भरे इस महत्वपूर्ण कार्य को मेरा प्रणाम और कोटिश: बधाईयाँ !

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  5. पिछ्ले वर्ष की श्रृंखला आँखो के सम्मुख उपस्थित हो गयी है । प्रत्येक कड़ी का इंतजार रहेगा बेसब्री से । अपका श्रम, आपकी प्रतिबद्धता कार्य को महत्वपूर्ण और सुन्दर बना देते हैं । आभार ।

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  6. वैसे तो पता है की अपना नामोनिशान नहीं होगा पर फिर भी शुभकामनाएं.. :)

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  7. काफी दिनों बाद आपका रोचक विश्लेषण पढ़ने मिला . आभार

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  8. आवाज का तो सचमुच जबाब नहीं .. आपकी अगली कडियों का इंतजार रहेगा .. शुभकामनाएं !!

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  9. भाई श्री अनुराग शर्मा जी बहुत प्रभावशाली ढंग से आदरणीय प्रेमचंद जी की कथा का वांचन करते हैं
    आपके विश्लेषण से १०० % सहमत हूँ
    - लावण्या

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  10. इस श्रृंखला की सभी कडियों का इंतज़ार रहेगा

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  11. बहुत सुंदर! आप चिट्ठा जगत के लिए बड़ा काम कर रहे हैं।

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  12. सचमुच प्रशंसनीय , आपको कोटिश: बधाईयाँ !

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  13. इस दस्तावेजीकरण के लिए आप का अवदान याद किया जायेगा !

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  14. जैसा कि अरविन्द जी ने कहा, हिन्दी चिट्ठों की इस विवेचना के लिए आप का योगदान याद किया जायेगा. मुंशी प्रेमचंद की कथाओं के सम्बन्ध में मेरी आवाज़ के सन्दर्भ के लिए आभारी हूँ. इतनी विस्तृत और विवेचनात्मक चर्चा के लिए धन्यवाद.

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  15. सालाना आयोजन का सब इन्तजार किया करेंगे !! अच्छा हुआ आप के सहारे हम कुछ छूटे हुए चिट्ठों पर पहुँच जायेंगे!

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आपका स्नेह और प्रस्तुतियों पर आपकी समालोचनात्मक टिप्पणियाँ हमें बेहतर कार्य करने की प्रेरणा प्रदान करती हैं.

 
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