
भूख-वहशी , भ्रम -इबादत वजह क्या है
हो गयी नंगी सियासत , वजह क्या है ?
मछलियों को श्वेत बगुलों की तरफ से -
मिल रही क्या खूब दावत , वजह क्या है ?
राजपथ पर लड़ रहे हैं भेडिये सब -
आम -जन की जान आफत , वजह क्या है ?
वीर योद्धाओं के पावन मुल्क में अब -
खो गयी मर्दों की ताक़त , वजह क्या है ?
आजकल बेटों को अपने बाप की भी -
कड़वी लगती है नसीहत , वजह क्या है ?
यूँ ग़ैर की करते तरफदारी '' प्रभात''
क्यों नहीं अपनों की चाहत , वजह क्या है ?
() रवीन्द्र प्रभात
(कॉपी राइट सुरक्षित )

नई दिल्ली से सुषमा सिंह की एक विस्तृत रपट रविवार दिनांक 8 मई 2011 के दैनिक जनसंदेश टाइम्स, लखनऊ में पेज 19 पर प्रकाशित।


































8 comments:
ऐसा क्यों हुआ , कैसे हुआ , कब हुआ , सवाल है उलझा हुआ... कुछ ऐसा ही सवाल मेरे बेटे ने किया था तब एक कविता ने जन्म लिया था ... याद आ गई , अब उसे शीघ्र ही पोस्ट करूँगी.
प्रिय रवीन्द्र जी,
एक बार फिर वेहद सुंदर और सामयिक प्रस्तुति हेतु बधाईयाँ!
यूँ ग़ैर की करते तरफदारी '' प्रभात''
क्यों नहीं अपनों की चाहत , वजह क्या है ?
बहुत अच्छा है हुज़ूर. पते की बात कह गए आप.
आपके प्रश्न चिंतन का विषय है।
दीपक भारतदीप
वजह बस इतनी सी है कि सब गुमनामी के अंधेरों की तरफ अग्रसर है , स्थिति दुखद नहीं जानलेवा है
वेहद सुंदर और सामयिक प्रस्तुति हेतु बधाईयाँ!
आपने सबकुछ कह दिया और पूछ रहे हैं वजह क्या है ?
इस पर मैं यही कहूंगी क्या बात है?
बहुत खूब प्रभात जी,
अच्छी लगी आपकी ग़ज़ल !
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