शब्द सभागार

ब्लॉगिंग पर आ गयी तीसरी पुस्तक भी ,लोकार्पण ९ दिसंबर को

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यू. जी. सी. संपोषित ब्लॉगिंग पर पहली संगोष्ठी कल्याण में 
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कल्याण (मुम्बई) आगामी ९ दिसंबर २०११ को सुबह १० बजे से कल्याण पश्चिम स्थित के.एम. अग्रवाल कला,वाणिज्य एवं विज्ञान महाविद्यालय में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग संपोषित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन होने जा रहा है. संगोष्ठी का मुख्य विषय है “हिंदी ब्लॉगिंग: स्वरुप,व्याप्ति और संभावनाएं “. यह संगोष्ठी शनिवार १० दिसंबर २०११ को सायं ५ बजे तक चलेगी.

संगोष्ठी के उदघाटन सत्र में डा. विद्या विन्दु सिंह (पूर्व निदेशिका उत्तरप्रदेश हिंदी संस्थान लखनऊ ),श्री रवि रतलामी (वरिष्ठ हिंदी ब्लॉगर,भोपाल,मध्य प्रदेश) एवं डा. रामजी तिवारी (पूर्व अध्यक्ष हिंदी विभाग,मुम्बई विद्यापीठ मुम्बई) उपस्थित रहेंगे .विशिष्ट अथिति के रूप में नवभारत टाइम्स मुम्बई के मुख्य उप संपादक श्री राजमणि त्रिपाठी भी उपस्थित रहेंगे. संगोष्ठी का उदघाटन संस्था के सचिव श्री विजय नारायण पंडित करेंगे.

इस संगोष्ठी का ‘वेब कास्टिंग’ के माध्यम से पूरी दुनिया में जीवंत प्रसारण (लाईव वेबकास्ट) भी की जायेगी,जिसकी जिम्मेदारी वेब ब्लॉगिंग के विशेषज्ञ हिंदी ब्लॉगर श्री गिरीश बिल्लोरे(जबलपुर,मध्य प्रदेश) को दी गयी है. विश्वविद्यालय अनुदान आयोग संपोषित हिंदी ब्लॉगिंग पर आयोजित होने वाली यह देश की संभवत: पहली संगोष्ठी होगी. इस संगोष्ठी में प्रस्तुत किये जाने वाले शोध प्रबंधों को पुस्तकाकार रूप में प्रकाशित करने की योजना भी महाविद्यालय बना चुका है. हिंदी ब्लॉगिंग पर प्रकाशित होने वाली यह तीसरी पुस्तक होगी. उल्लेखनीय है कि इसके पूर्व हिंदी ब्लॉगिंग पर पहली पुस्तक अविनाश वाचस्पति और रवीन्द्र प्रभात द्वारा संपादित पुस्तक “हिंदी ब्लॉगिंग: अभिव्यक्ति की नई क्रान्ति तथा दूसरी रवीन्द्र प्रभात के द्वारा स्वरचित पुस्तक “हिंदी ब्लॉगिंग का इतिहास” है.

इस संगोष्ठी में संपूर्ण भारत से प्रतिभागी आ रहे हैं . इनमें दिल्ली से अविनाश वाचस्पति और हरीश अरोरा, मेरठ से डा. अशोक मिश्र, लखनऊ से रवीन्द्र प्रभात और सिद्दार्थ शंकर त्रिपाठी, हिमांचल प्रदेश से केवल राम,कोलकाता से शैलेश भारतवासी और आशीष मेहता,कानपुर से मानव मिश्र,भोपाल से रवि रतलामी,जबलपुर से गिरीश बिल्लोरे,पंजाब से डा. अशोक कुमार, मुम्बई से श्रीमती अनिता कुमार,युनुस खान और अनूप सेठी इत्यादि. साथ ही वरिष्ठ साहित्यकार श्री आलोक भट्टाचार्या भी इस संगोष्ठी में सम्मिलित हो रहे हैं. विभिन्न महाविद्यालयों -विश्वविद्यालयों से जुड़े प्राध्यापक भी बड़ी संख्या में इस संगोष्ठी में शामिल हो रहे हैं. इनमें से कुछ प्रमुख नाम है -डा. राम जी तिवारी(मुम्बई),डा. आर. पी, त्रिवेदी(मुम्बई),डा. प्रकाश मिश्र(कल्याण),डा. एस. पी. दुबे (मुम्बई),डा. सतीश पाण्डेय(मुम्बई),डा. के. पी. सिंह(एटा),डा. ए.एन.राय (राय बरेली),डा. शमा खान(बुलंद शहर),डा. इश्वर पवार(पुणे),डा. गाडे(सतारा),डा. शास्त्री(कर्नाटक),डा. परितोष मणि(मेरठ),डा. अनिल सिंह(मुम्बई),डा. कमलिनी पानी ग्राही(भुबनेश्वर),डा. पवन अग्रवाल (लखनऊ),डा. मधु शुक्ला (इलाहाबाद),डा. पुष्पा सिंह (असम),डा. गणेश पवार(तिरुपति ),विभव मिश्र,मेल्बौर्ण(ऑस्ट्रेलिया),डा. सुरेश चन्द्र शुक्ल (नार्वे ),डा. शशि मिश्र (मुम्बई),डा. सुधा (दिल्ली),डा. विनीता(दिल्ली),डा. बलजीत श्रीवास्तव(बस्ती),डा. विजय अवस्थी(नासिक),डा. संजीव दुबे(मुम्बई),डा. वाचस्पति (आगरा),डा. संजीव श्रीवास्तव(आगरा),डा. सजीव श्रीवास्तव(मथुरा) ,डा. दी. के. मिश्रा (झांसी) इत्यादि.

दो दिवसीय यह संगोष्ठी कुल छ: सत्रों में विभाजित है. उदघाटन सत्र एवं समापन सत्र के अतिरिक्त चार चर्चा सत्र होंगे. पूरी संगोष्ठी का संयोजन महाविद्यालय के हिंदी विभाग के प्रभारी डा. मनीष कुमार मिश्रा कर रहे हैं. चार चर्चा सत्रों के लिए चार सत्र संयोजक न्युक्त किये गए हैं. क्रमश: डा. आर. वी. सिंह (उप प्राचार्य,अग्रवाल कॉलेज),डा. श्रीमती रत्ना निंबालकर (उप प्राचार्य, अग्रवाल महा विद्यालय),डा. वी. के. मिश्र (वरिष्ठ प्राध्यापक) एवं सी ए महेश भिवंदिकर (वरिष्ठ प्राध्यापक अग्रवाल कॉलेज) रहेंगे . महाविद्यालय की प्राचार्या डा. अनिता मानना संगोष्ठी से जुडी तैयारियों की व्यक्तिगत तौर पर देख-रेख कर रही हैं.

इस संगोष्ठी की मुख्य बातें यह है कि यह विश्वविद्यालय अनुदान आयोग से संपोषित हिंदी ब्लॉगिंग पर संभवत: पहली संगोष्ठी है, पूरे दो दिन की संगोष्ठी का वेब कास्टिंग के जरीय इसका इंटरनेट पर सीधा प्रकाशन होगा, इस संगोष्ठी में प्रस्तुत किये जाने वाले शोध आलेखों को पुस्तकाकार रूप में प्रकाशित किया जा रहा है जो कि हिंदी ब्लॉगिंग पर प्रकाशित होने वाली तीसरी पुस्तक होगी. हिंदी चिट्ठाकारों एवं हिंदी प्राध्यापकों को एक साथ राष्ट्री मंच प्रदान करने का यह नूतन प्रयोग होगा.

कार्यक्रम का संपूर्ण विवरण इसप्रकार है :

नहीं रहे कुमार विमल

साहित्य-सृजन के क्षेत्र में जाने माने शख्सियत डॉ. कुमार विमल का

पटना में निधन हो गया। उन्होंने 13 अक्टूबर 2011 को अपना 80 वां जन्म दिन मनाया था। 80 साल के हो जाने के बावजूद साहित्य-सृजन करते रहे। आजकल के दिसंबर अंक में उनका लेख प्रकाशित हुआ है। विभिन्न विधाओं में उनकी दर्जनों पुस्तकें जहां चर्चित हैं वहीं साहित्य के क्षेत्र में धरोहर के रूप में स्थापित भी हैं। डॉ. कुमार विमल के निधन पर साहित्य जगत में शोक की लहर दौड़ गयी है। सृजनगाथा परिवार की ओर से डॉ. कुमार विमल को श्रद्धांजलि।
 
कुमार विमल का जन्म 12 अक्टूबर, 1931को हुआ था । साहित्यिक जीवन का प्रारंभ काव्य रचना से, उसके बाद आलोचना में प्रवृति रम गई। 1945 से विभिन्न प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में कविता, कहानी और आलोचनात्मक लेख आदि प्रकाशित हो रहे हैं। इनकी कई कविताएं अंगे्रजी, चेक, तेलगु, कश्मीरी गुजराती, उर्दू, बंगला और मराठी में अनुदित। वे मगध व पटना विश्वविद्यालय में हिन्दी प्राध्यापक रहे । बाद में निदेशक बिहार राष्ट्रभाषा परिषद्, पटना । वे संस्थापक आद्य सचिव, साहित्यकार कलाकार कल्याण कोष परिषद्, पटना नांलदा मुक्त विश्वविद्यालय में कुलपति भी रहे । इसके अलावा अध्यक्ष, बिहार लोक सेवा आयोग, बिहार विश्वविद्यालय कुलपति बोर्ड, हिन्दी प्रगति समिति, राजभाषा बिहार, बिहार इंटरमीडियएट शिक्षा परिषद् और बिहार राज्य बाल श्रमिक आयोग भी रहे । वे ज्ञानपीठ पुरस्कार से संबंधित हिन्दी समिति के सदस्य और बिहार सरकार उच्च स्तरीय पुरस्कार चयन समिति के अध्यक्ष सहित साहित्य अकादमी, दिल्ली, भारतीय भाषा संस्थान, मैसूर और भारत सरकार के कई मंत्रालयों की हिन्दी सलाहकार समिति के सदस्य रह चुके हैं।
 
उनकी कई आलोचनात्मक कृतियां, पुरस्कार-योजना समिति (उत्तर प्रदेश) बिहार राष्ट्रभाषा परिषद्, पटना,राजा राधिकारमण प्रसाद सिंह विशेष साहित्यकार सम्मान, हरजीमल डालमिया पुरस्कार दिल्ली, सुब्रह्मण्यम भारती पुरस्कार, आगरा तथा बिहार सरकार का डॉ. राजेन्द्र प्रसाद शिखर सम्मान अर्जित कर चुकी हैं ।
 
अब तक लगभग 40 पुस्तकों का प्रकाशन हो चुका है जिनमें आलोचना में ‘मूल्य और मीमांसा’, ‘महादेवी वर्मा एक मूल्यांकन’, ‘उत्तमा’, कविता में – ‘अंगार’, ‘सागरमाथा’ प्रमुख हैं । उनके संपादित ग्रंथ- गन्धवीथी (सुमित्रा नंदन पंत की श्रेष्ठ प्रकृति कविताओं का विस्तृत भूमिका सहित संपादन संकलन), ‘अत्याधुनिक हिन्दी साहित्य’ आदि हैं ।

कम उम्र में ‘राष्ट्रीय बाल पुरस्कार’ प्राप्त कर अक्षिता (पाखी) ने बनाया कीर्तिमान

आज के आधुनिक दौर में बच्चों का सृजनात्मक दायरा बढ़ रहा है. वे न सिर्फ देश के भविष्य हैं, बल्कि हमारे देश के विकास और समृद्धि के संवाहक भी. जीवन के हर क्षेत्र में वे अपनी प्रतिभा का डंका बजा रहे हैं. बेटों के साथ-साथ बेटियाँ भी जीवन की हर ऊँचाइयों को छू रही हैं. ऐसे में वर्ष 1986 से हर वर्ष शिक्षा, संस्कृति, कला, खेल-कूद तथा संगीत आदि के क्षेत्रों में उत्कृष्ट उपलब्धि हासिल करने वाले बच्चों हेतु हेतु महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा ‘राष्ट्रीय बाल पुरस्कार’ आरम्भ किये गए हैं। चार वर्ष से पन्द्रह वर्ष की आयु-वर्ग के बच्चे इस पुरस्कार को प्राप्त करने के पात्र हैं.

वर्ष 2011 के लिए ‘राष्ट्रीय बाल पुरस्कार’ 14 नवम्बर 2011 को विज्ञानं भवन, नई दिल्ली में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में भारत सरकार की महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती कृष्णा तीरथ द्वारा प्रदान किये गए. विभिन्न राज्यों से चयनित कुल 27 बच्चों को ये पुरस्कार दिए गए, जिनमें मात्र 4 साल 8 माह की आयु में सबसे कम उम्र में पुरस्कार प्राप्त कर अक्षिता (पाखी)  ने एक कीर्तिमान स्थापित किया. गौरतलब है कि इन 27 प्रतिभाओं में से 13 लडकियाँ चुनी गई हैं. सम्प्रति अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में भारतीय डाक सेवा के निदेशक और चर्चित लेखक, साहित्यकार, व ब्लागर कृष्ण कुमार यादव एवं लेखिका व ब्लागर आकांक्षा यादव की सुपुत्री और पोर्टब्लेयर में कारमेल सीनियर सेकेंडरी स्कूल में के. जी.- प्रथम की छात्रा अक्षिता (पाखी) को यह पुरस्कार कला और ब्लागिंग के क्षेत्र में उसकी विलक्षण उपलब्धि के लिए दिया गया है.

इस अवसर पर जारी बुक आफ रिकार्ड्स के अनुसार- ”25 मार्च, 2007 को जन्मी अक्षिता में रचनात्मकता कूट-कूट कर भरी हुई है। ड्राइंग, संगीत, यात्रा इत्यादि से सम्बंधित उनकी गतिविधियाँ उनके ब्लाॅग ’पाखी की दुनिया  पर उपलब्ध हैं, जो 24 जून, 2009 को आरंभ हुआ था। इस पर उन्हें अकल्पनीय प्रतिक्रियाएं प्राप्त हुईं। 175 से अधिक ब्लाॅगर इससे जुडे़ हैं। इनके ब्लाॅग 70 देशों के 27000 से अधिक लोगों द्वारा देखे गए हैं। अक्षिता ने नई दिल्ली में अप्रैल, 2011 में हुए अंतर्राष्ट्रीय ब्लाॅगर सम्मेलन में 2010 का ’हिंदी साहित्य निकेतन परिकल्पना का सर्वोत्कृष्ट पुरस्कार’ भी जीता है।इतनी कम उम्र में अक्षिता के एक कलाकार एवं एक ब्लाॅगर के रूप में असाधारण  प्रदर्शन ने उन्हें उत्कृष्ट उपलब्धि हेतु ‘राष्ट्रीय बाल पुरस्कार, 2011’ दिलाया।”इसके तहत अक्षिता को भारत सरकार की महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती कृष्णा तीरथ द्वारा 10,000 रूपये नकद राशि, एक मेडल और प्रमाण-पत्र प्रदान किया गया.

यही नहीं यह प्रथम अवसर था, जब किसी प्रतिभा को सरकारी स्तर पर हिंदी ब्लागिंग के लिए पुरस्कृत-सम्मानित किया गया. अक्षिता का ब्लॉग ‘पाखी की दुनिया’  हिंदी के चर्चित ब्लॉग में से है और इस ब्लॉग का सञ्चालन उनके माता-पिता द्वारा किया जाता है, पर इस पर जिस रूप में अक्षिता द्वारा बनाये चित्र, पेंटिंग्स, फोटोग्राफ और अक्षिता की बातों को प्रस्तुत किया जाता है, वह इस ब्लॉग को रोचक बनता है.

(कृष्ण कुमार यादव की रपट )

‘हिंदी साहित्य निकेतन शोध पुरस्कार’ की घोषणा

हिंदी साहित्य निकेतन देश का ऐसा विशिष्ट संस्थान है, जो हिंदी शोध की दिशा में

विशेष रूप से सक्रिय है। इस संस्थान ने अभी तक हिंदी में संपन्न शोध की पूरी

सूचनाएँ लगभग 3000 पृष्ठों के पाँच खंडों में प्रकाशित की है।

हिंदी साहित्य निकेतन ने अपनी स्वर्णजयंती के अवसर पर प्रकाशित शोध प्रबंधों पर

‘हिंदी साहित्य निकेतन शोध पुरस्कार’ देने की घोषणा की है।

नियम एवं शर्तें-

1-इस वर्ष पुरस्कार की राशि 25000 रुपए होगी।

2-पुरस्कार हेतु पिछले तीन वर्षों में (2009 तथा बाद के) प्रकाशित शोध-प्रबंध स्वीकार्य होंगे।

3-शोध-प्रबंधों की तीन प्रतियाँ (निर्मूल्य) पंजीकृत डाक से भेजनी होंगी।

4-पुरस्कार का निर्णय विद्वानों की एक समिति द्वारा किया जाएगा।

5-प्रविष्टि भेजते समय किसी भी पुस्तक पर अपना विवरण न लिखें, न ही हस्ताक्षर करे।

6-अलग से ए-4 साइज़ के काग़ज़ पर अपना विस्तृत परिचय भेजें तथा उस पर अपना रंगीन चित्र अवश्य चिपकाएँ।

7-प्रविष्टि भेजने की अंतिम तिथि 20 जनवरी 2012 है।

8-निर्णायक मंडल द्वारा किया गया निर्णय अंतिम तथा सभी को स्वीकार्य होगा।

9-समस्त प्रविष्टियाँ निम्न पते पर प्रेषित की जाएँ-

 

MONDAY, NOVEMBER 14, 2011

चौंथा अंतरराष्ट्रीय हिन्दी समारोह बैंकाक में

रायपुर । वरिष्ठ कवि व ‘दुनिया इन दिनों’ के प्रधान संपादक डॉ. सुधीर सक्सेना, भोपाल को उनकी कविता संग्रह ‘रात जब चंद्रमा बजाता है’ तथा स्त्री विमर्श के लिए प्रतिबद्ध लेखिका व आउटलुक, हिन्दी की सहायक संपादिका, गीताश्री को उनकी संपादित कृति ‘नागपाश में स्त्री’ तथा युवा पत्रकार, दैनिक भारत भास्कर (रायपुर) के संपादक श्री संदीप तिवारी से नवाजा गया है । यह निर्णय देश के चुनिंदे 1000 युवा साहित्यकार-पाठकों की राय पर निर्धारित किया गया । यह सम्मान उन्हें चौंथे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन, बैंकाक, थाईलैंड में 17 दिसंबर, 2011 को दी जायेगी । सम्मान स्वरूप उन्हें 11-11 हजार का चेक, प्रशस्ति पत्र, प्रतीक चिन्ह और साहित्यिक कृतियां भेंट की जायेंगी ।

ज्ञातव्य हो कि साहित्य, संस्कृति और भाषा के लिए प्रतिबद्ध साहित्यिक संस्था (वेब पोर्टल )सृजन गाथा डॉट कॉम पिछले पाँच वर्षों से ऐसी युवा विभूतियों को सम्मानित कर रही है जो कला, साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दे रहे हैं । इसके अलावा वह तीन अंतरराष्ट्रीय हिन्दी सम्मेलनों का संयोजन भी कर चुकी है जिसका पिछला आयोजन मॉरीशस में किया गया था । अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हिंदी और हिंदी-संस्कृति को प्रतिष्ठित करने के लिए संस्था द्वारा, किये जा रहे प्रयासों और पहलों के अनुक्रम में आगामी 15 से 21 दिसंबर तक थाईलैंड में चतुर्थ अंतरराष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है । सम्मेलन में हिंदी के आधिकारिक विद्वान, अध्यापक, लेखक, भाषाविद्, पत्रकार, टेक्नोक्रेट एवं हिंदी प्रचारक भाग ले रहे हैं ।

सम्मेलन का मूल उद्देश्य स्वंयसेवी आधार पर हिंदी-संस्कृति का प्रचार-प्रसार, भाषायी सौहार्द्रता एवं सांस्कृतिक अध्ययन-पर्यटन का अवसर उपलब्ध कराना है। उक्त अवसर पर आयोजित संगोष्ठी – हिन्दी की वैश्वकिता पर प्रतिभागी अपना आलेख पाठ कर सकेंगे । इसके अलावा प्रतिभागियों के लिए बैंकाक, पटाया, कोहलर्न आईलैंड थाई कल्चरल शो, गोल्डन बुद्ध मंदिर, विश्व की सबसे बड़ी जैम गैलरी, सफारी वर्ल्ड आदि स्थलों का सांस्कृतिक पर्यटन का अवसर भी उपलब्ध होगा । आयोजन संयोजक जयप्रकाश मानस व डॉ. सुधीर शर्मा ने बताया है कि इस वर्ष इसके अलावा हिन्दी ब्लॉगिंग के लिए प्रतिबद्ध रवीन्द्र प्रभात (लखनऊ),मुंबई की कथाकार संतोष श्रीवास्तव, संस्कृति कर्मी सुमीता केशवा,  आधारशिला के संपादक दिवाकर भट्ट (देहरादून), सिनेमा लेखन के लिए प्रमोद कुमार पांडेय (मेरठ), नागपुर विवि के हिंदी विभागाध्यक्ष प्रमोद कुमार शर्मा, प्रवासी लेखिका देवी नागरानी (यूएसए), ओडिया से हिन्दी अनुवादक श्री दिनेश माली(ब्रजराजनगर, ओडिसा) हिन्दी के प्रकाशक श्री शांति स्वरूप शर्मा (यश पब्लिकेशंस, दिल्ली) आदि को उनकी उल्लेखनीय सेवा के लिए सृजनश्री सम्मान से सम्मानित किया जायेगा ।

सभी रचनाकारों को सृजनगाथा डॉट कॉम परिवार और वैभव प्रकाशन की ओर से बधाईयाँ ।