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सोमवार, 30 जनवरी 2012

परिकल्पना ब्लॉग विश्लेषण-2011 (भाग-6 )

सिनेमा पर केन्द्रित ब्लॉग की दृष्टि से दरिद्र और
राजनीति पर केन्द्रित ब्लॉग की दृष्टि से औसत रहा वर्ष-2011

...........गतांक से आगे 

भारतीय सिनेमा इस समय संसार का, फिल्‍मों की संख्‍या के मान से, सबसे बड़ा सिनेमा है। लेकिन सिनेमा पर आधारित ब्लॉग की दृष्टि से हम अभी भी काफी दरिद्र हैं । इसका सबसे बड़ा उदाहरण है कि वर्ष-2011  में एक मात्र प्रयोगधर्मी अभिनेता मनोज बाजपेयी ने अपने ब्लॉग के जरिए अनुभवों को बाँटते नज़र आये । अपने व्यस्त दिनचर्या के वाबजूद इन्होनें अपने ब्लॉग पर इस वर्ष 9  संस्मरणात्मक पोस्ट प्रकाशित किये हैं ।

वहीँ अजय ब्रह्मात्मज के चवन्नी चैप पर इस वर्ष फिल्म से संवंधित कई महत्वपूर्ण जानकारियाँ दी गयी । यह ब्लॉग सिनेमा पर आधारित ब्लॉग की श्रेणी में सर्वाधिक सक्रिय रहा इस वर्ष । इस ब्लॉग पर इस वर्ष 200 से ज्यादा पोस्ट प्रकाशित हुए । फिल्म की समीक्षा के क्षेत्र में इधर रश्मि रविजा का नाम तेजी से लोकप्रिय हुआ है ।रश्मि रविजा, वरिष्ठ साहित्यकार और वेब पत्रकार हैं और इनकी गतिविधियाँ इनके स्वयं के ब्लॉग के अलावा विभिन्न महत्वपूर्ण वेब पत्रिकाओं पर भी देखी जा सकती है  

सिनेमा पर आधारित  सक्रिय ब्लॉग हालांकि हिंदी में बहुत कम दिखते हैं।  प्रमोद सिंह के ब्लॉग सिनेमा सिलेमा पर पूरे वर्ष मात्र एक दर्जन पोस्ट पढ़ने को मिले हैं वहीं दिनेश श्रीनेत ने इंडियन बाइस्कोप पर इस वर्ष  केवल छ: पोस्ट प्रकाशित किये,जो निजी कोनों से और भावपूर्ण अंदाज में सिनेमा को देखने की एक कोशिश मात्र कही जा सकती है ।वहीँ अंकुर जैन का ब्लॉग साला सब फ़िल्मी है पर  17  पोस्ट प्रकाशित हुए इस वर्ष ।महेन के चित्रपट ब्लॉग तथा राजेश त्रिपाठी का सिनेमा जगत ब्लॉग पर इस वर्ष पूरी तरह खामोशी छायी रही ।  हालांकि 15  जून 2011 को खुले पन्ने ब्लॉग पर प्रकाशित क्या है हिंदी सिनेमा का यथार्थवाद काफी पसंद किया गया । वैसे विस्फोट डोट कॉम पर भी सिनेमा पर आधारित कुछ वेहतर सामग्री प्रकाशित हुई है इस वर्ष।


जहां तक फिल्म समीक्षा का प्रश्न है हिंदी में अच्छी फिल्म समीक्षाएँ कम पढ़ऩे को मिलती हैं। खासकर ब्लॉग पर तो बहुत ही कम। कभी-कभार रवीश कुमार का ब्लॉग कस्बा, अविनाश का ब्लॉग मोहल्ला, अनुराग वत्स का ब्लॉग सबदउन्मुक्त के साथ-साथ वेबदुनिया,फिल्म कहानी, तरकश,ख़ास खबर,  पर फिल्म संबंधी लेख और समीक्षाएँ पढ़ने को मिले हैं इस वर्ष। ब्लॉग की दुनिया ने तमाम लोगों को आकर्षित किया है।


इस वर्ष तीन अच्छे फ़िल्मी ब्लॉग क्रमश: सिंगल थिएटर ,नवपथ और लेटेस्ट बोलीवुड न्यूज इन हिंदी अस्तित्व में आये हैं । फिर भी हिंदी सिनेमा के विस्तृत आकास के दृष्टिगत यह नाकाफी है । विनोद अनुपम ने सिंगल थिएटर पर इस दिशा में बहुत अच्छा काम किया है। विनोद की सबसे बड़ी खासियत है कि ये फिल्म की संश्लिष्ट समीक्षाओं के बजाय फिल्म की कुछ खूबियों और कमजोरियों का जिक्र करते हैं

वैसे तो काफी सारे ब्लॉग्स हैं जहां सभी तरह की हिंदी फिल्म  मुफ्त में देखे जा सकते हैं, इसमे न सिर्फ सभी वर्गों की फिल्मे है, साथ ही इसमे आपको डब फिल्मे, टीवी सीरिअल और शो, लाइव टीवी, लाइव रेडियो और साथ ही काफी सारे वृतचित्र (Documentaries) भी देखने को मिलेंगे वो भी मुफ्त, साईट का नाम है:- hindilinks-4-u और लिंक यह है

 इसी तरह की कुछ और मुफ़्त साइटें 

साथ ही अगर आपको कुछ पैसे देकर फिल्म देखने का शौक है तो दो बेहतरीन वेबसाइट है जो कुछ पैसे लेकर आपको दुनिया भर की फिल्मे दिखाती है इसमे पहली है-
1. http://dingora.com/ ....इसमे आपको कुछ ऐसी फिल्मे भी देखने को मिलेंगे जो की सिर्फ समीक्षकों के किये ही बनी थी और दूसरी साईट है....
2. http://www.utvworldmovies.com/...इसमे आपको कई तरह की सुविधाएँ मिलेंगी जिसमे खास है अलग अलग देशों के अनुसार अलग अलग फिल्मे चुनने के लिए गूगल मेप जैसे सुविधा और भी कई तरह की सुविधाएँ है 

इसीप्रकार जहाँ तक राजनीति को लेकर ब्लॉग का सवाल है तो वर्ष 2011 भारतीय राजनीति में भ्रष्टाचार की लगातार उधडती परतों के बाद ए. राजा जैसे मंत्रियों और कुछ कारपोरेट कंपनी के दिग्गज शाहिद बलवा, विनोद गोयेनका और संजय चंद्रा जैसे लोगो के तिहाड़ पहुँचने के साथ अन्ना के भ्रष्टाचार के विरोध और मजबूत लोकपाल के लिए हुए आन्दोलन और उसे मिले जनसमर्थन के लिए जाना जाएगा भ्रष्टाचार के इन आरोपों ने उत्तराखंड से निशंक और कर्नाटक से येदुरप्पा को गद्दी छोड़ने के लिए मजबूर किया इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट के कुछ फैसलों जैसे संसद की सर्वोच्चता पर प्रश्न उठाने के लिए भी जाना जाएगा महिला आरक्षण बिल इस वर्ष भी लटका रहा और वर्ष के अंत में राजनैतिक षड्यंत्र के बीच इसमे लोकपाल बिल का नाम भी जुड़ गया। ऐसा कहना है आशीष तिवारी का दखलंदाजी पर 

करीब 15 साल तक हिंदी के तमाम राष्ट्रीय समाचार पत्रों में काम करने करने के बाद अब दिल्ली में अपना बसेरा बनाने वाले महेंद्र श्रीवास्तव के ब्लॉग आधा सच का नाम मैं प्रमुखता के साथ लेना चाहूंगा, क्योंकि यह ब्लॉग 2011  में अस्तित्व में आया है और छ: दर्जन के आसपास पोस्ट प्रकाशित कर समसामयिक राजनीति और समाज की गहन पड़ताल करने की सफल कोशिश की है 

दूसरी सबसे बड़ी बात यह है कि चाहे किसी भी भाषा का ब्लॉग हो अमूमन महिलाओं की राजनैतिक टिप्पणियाँ कम ही देखी जाती है, किन्तु हिंदी में एक ब्लॉग mangopeople  लेकर आई अंशुमाला ने वर्ष-2010 के जनवरी महीने में जो वर्ष-2011  आते-आते आक्रामक दिखने लगा  । सामाजिक और राजनीतिक विषयों पर इस ब्लॉग में इस वर्ष कभी विरोध के स्वर देखे गए तो कहीं विचारों का द्वंद्व । कुल मिलाकर यह ब्लॉग राजनीति के वेहद सक्रीय चिट्ठों में से एक रहा इस वर्ष ।

अनियमितता के वाबजूद  इस वर्ष जनोक्ति और  विचार मीमांशा भी औसत रूप से मुखर रहा ।अफलातून के ब्लॉग समाजवादी जनपरिषद और प्रमोदसिंह के अजदक तथा हाशिया का जिक्र किया जाना चाहिए। इन  सभी ब्लॉग्स पर पोस्ट की संख्या ज्यादा तो नहीं देखि गयी इस वर्ष,किन्तु विमर्श के माध्यम से ये सभी इस वर्ष अपनी सार्थक उपस्थिति दर्ज कराने में सफल हुए हैं । रविकांत प्रसाद का ब्लॉग बेवाक टिपण्णी पर इस वर्ष केवल तीन पोस्ट आये, वहीँ इस वर्ष नसीरुद्दीन के ढाई आखर पर सन्नाटा पसरा रहा  जबकि उद्भावना पर सात पोस्ट और अनिल रघुराज के एक हिन्दुस्तानी की डायरी पर केवल एक पोस्ट आया इस वर्ष । भारतीय ब्लॉग लेखक संघ  और महाराज सिंह परिहार के ब्लॉग विचार बिगुल पर भी इस वर्ष कुछ बेहतर राजनैतिक आलेख पढ़े गए ।


पुण्य प्रसून बाजपेयी ब्लॉग भी है और ब्लॉगर भी,जिसपर वर्ष-2011 में कूल 71 पोस्ट प्रकाशित हुए और सभी गंभीर राजनीतिक विमर्श से ओतप्रोत। पुण्य प्रसून बाजपेयी न्यूज़ (भारत का पहला समाचार और समसामयिक चैनल) में प्राइम टाइम एंकर और सम्पादक हैं। पुण्य प्रसून बाजपेयी के पास प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में 20 साल से ज़्यादा का अनुभव है। प्रसून देश के इकलौते ऐसे पत्रकार हैं, जिन्हें टीवी पत्रकारिता में बेहतरीन कार्य के लिए वर्ष 2005 का ‘इंडियन एक्सप्रेस गोयनका अवार्ड फ़ॉर एक्सिलेंस’ और प्रिंट मीडिया में बेहतरीन रिपोर्ट के लिए 2007 का रामनाथ गोयनका अवॉर्ड मिला। इस श्रेणी के ब्लॉग में रजनीश के. झा का ब्लॉग आर्यावर्त भी काफी मुखर दिखा इस वर्ष। आलोचना के कॉमनसेंस के प्रतिवाद में इस वर्ष जगदीश्वर चतुर्वेदी का ब्लॉग नया ज़माना  और रणधीर सिंह सुमन का ब्लॉग  लोकसंघर्ष कुछ ज्यादा आक्रामक दिखा है । राजनीति पर कटाक्ष करते इस वर्ष इरफ़ान, काजल कुमार और चन्द्र प्रकाश हुडा के कार्टून पाठकों के द्वारा काफी पसंद किये गए ।
चन्द्र्शेखर के सुभाष

डा. सुभाष राय का बात बेबात ब्लॉग इस वर्ष अनियमितता के बावजूद भी कुछ वेहतर पोस्ट प्रस्तुत करने में सफल रहा है जैसे सरकार और सरोकार नहीं बाज़ार बदल रहा है स्त्री को, मैं नाच्यो बहुत गोपाल आदि।उल्लेखनीय है कि डा. सुभाष राय हिन्दी दैनिक जनसंदेश टाइम्स का संपादक बनकर लखनऊ आये  आठ फरवरी 2011  से इसका विधिवत प्रकाशन शुरू हुआ इन्हें  पता है कि एक स्वस्थ और सकारात्मक समाज के लिए जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में घटने वाली मानवीय घटनाओं का कितना महत्त्व है मनुष्य और उसके जीवन का परिष्कार करने वाले अनुशासनों की ओर लोगों को मोड़ने का इनका संकल्प है साहित्य, कला, संस्कृति और विचार मनुष्य को मानवीय और मददगार बनाये रखने में सहायता करते हैं, इसलिए इन क्षेत्रों की गतिविधियों के लिए इनके ह्रदय में भरपूर जगह है एक संस्कार संपन्न, सभ्य और परहितकातर समाज बनाने में ये आजकल रचनात्मक रूप से पूर्णत: जुटे हुए हैं । इनके द्वारा लिखे गए संपादकीय को आप इस ब्लॉग जनसंदेश टाइम्स पर क्रमवार पढ़ सकते हैं ।

इस वर्ष जून में शिवम् मिश्रा द्वारा संचालित अपने आप में एक अनोखा ब्लॉग आया नाम है  पोलिटिकल जोक्स - Political Jokes । इस ब्लॉग की सबसे बड़ी विशेषता है राजनितिक और समसामयिक विषयों पर चुटीली वो  मारक टिपण्णी । एक बानगी देखिए "ये मनमोहन भी ले लो;  ये दिग्विजय भी ले लो;  भले छीन लो हमसे सोनिया गांधी !  मगर हमको लौटा दो, वो कीमतें पुरानी;  वो आटा, वो गैस, वो बिजली, वो पानी !  बड़ी मेहरबानी, बड़ी मेहरबानी !! "

पश्चिम बंगाल के चुनाव परिणामों से इस बार नेता से लेकर टीवी चैनल्स तक सब सकते में हैं। जिस को सबसे ज्यादा सीटें हासिल हुई हैं वह खुश तो है लेकिन उसे भी यकीन नहीं था कि वह इतनी सीटें जीत लेंगी।कामरेड मुँह छिपाते फिर रहे हैं। उनका सुर्ख रंग बदरंग हो चुका है। चुनाव परिणामों, सत्ता की लालसा, विश्लेषण को लेकर ब्लॉग दुनिया ने खुलकर इस वर्ष अपनी प्रतिक्रिया दी है।राज्य से लेकर राष्ट्रीय राजनीति के कुछ बिंदुओं पर बात की गई है। कहीं गुस्सा है, कहीं खुशी है, कहीं विश्लेषण है तो कहीं व्यंग्य भी है और कहीं-कहीं काव्यमय प्रतिक्रिया भी दी गई हैं। आइए,एक नजर कुछ चुनिंदा ब्लॉग प्रतिक्रियाओं पर डाली जाए।

मेरी खबर डोट कॉम ने कहा बिखराव के कगार पर वाम मोर्चा, जबकि हस्तक्षेप डोट कॉम ने पूछा कि पश्चिम बंगाल के आम चुनावों में अमेरिकी दखलंदाजी पर भारतीय मीडिया चुप क्यों? पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के चुनाव नतीजों ने दो महिलाओं के नेतृत्व में दो बड़ी राजनैतिक क्रांतियों को अंजाम दिया है। दो ऐसे दिग्गजों को हाशिये से परे धकेल दिया गया, जिन्हें चुनौती देना कल तक असंभव सा था। ऐसा कहा है राजनितिक मंथन पर बालेन्दु शर्मा दाधीच ने । वहीँ मुहल्ला लाईव पर विश्वजीत सेन का कहना था कि अब बंगाल में जनता के साथ जो होगा, वह अकल्‍पनीय है! लोकजतन पर प्रकाश कारत का कहना था आगे कड़ी और लंबी लड़ाई है । हिमालय गौरव ने जहां पश्चिम बंगाल में जनता द्वारा लिखी गई इबारत के मायने पूछे वहीँ प्रवक्ता में जगदीश्वर चतुर्वेदी ने  पश्चिम बंगाल में ‘स्वशासन’ बनाम ‘सुशासन’ की जंग पर खुलकर चर्चा की है 


ब्लॉग को  न्यू मीडिया का स्वरुप दिलाने में कुछ ब्लॉग्स की अहम् भूमिका रही है, जिसमें से एक है भड़ास 4मीडिया   । चाहे सामजिक अतिक्रमण हो या  राजनीति का अपराधीकरण, चाहे विकास की कहर हो या विनास की लहर, चाहे भ्रष्टाचार का मुद्दा हो या विकृतियों के खिलाफ आन्दोलन, हर विषय पर इस वर्ष यह ब्लॉग सर्वाधिक मुखर रहा । जागरण जंक्सन के पोलिटिकल एक्सप्रेस और सोशल इश्यू स्तंभ पर इस वर्ष अनेकानेक महत्वपूर्ण राजनितिक सामग्रियां दखी गयी ।

इसके अलावा कबाडखाना, मुहल्ला लाईव , भड़ास, भड़ास blogनुक्कड़, सीधी खरी बात, न दैन्यं न पलायनम, डंके की चोट पर , रोज़ की रोटी, रोजनामचा, किश्तियाँ, आवाज़, पुरबिया, मीडिया केयर ग्रुप, खरी खरी, आज का मुद्दा, देश्नामा, इंद्रधनुष,कुछ परेशां सा करते सवाल, है कोई जवाब ?पंकज के कुछ 'पंकिल शब्द' , अंतर्मंथन, देश वन्धुआर्यावर्त..,सुनिए मेरी भी , उलटा पुल्टा, कलम का सिपाही, नेटवर्क ६,  आधारशिला, कडुवा सच ... , बुरा भला , कुछ बातें अनकही, अख्तर खान अकेला, जनशब्द, बिखरे आखर, ज़िन्दगी एक खामोश शहर, जागो भारत,माली गाँव, युवा मन,ZEAL ,पढ़ते पढ़ते, लोकसंघर्ष, ललित डोट कॉम, बोल पहाडी  ,जनपक्ष ,अंदाज़े मेरा , लोक वेब मीडिया, दीपक बाबा की बकबक , जो मेरा मन कहे , मेरा सरोकार , कलम , आनंद जोशी  , जुगाली , जीवन की आपाधापी , अंधड़    , आवाज़ इंडिया , मुझे कुछ कहना है  , गिरीश पंकज  , सर रतन, ढिबरी, कोशी खबर , कुछ अलग सा, परिकल्पना ब्लॉगोंत्सव  , प्रतिभा की दुनिया  ,  भारतीय नारी बैसवारी baiswari  Hindi Bloggers Forum International (HBFI) , धान के देश में! , यदुकुल प्रगतिशील ब्लॉग लेखक संघ ,इयत्ता  ,  मनोज  आदत...मुस्कुराने की  जिज्ञासा ,   स्वप्नदर्शी ,  हिन्दुस्तान का दर्द ,  मुकुल का मीडिया , अमीर धरती गरीब लोग  आदि ब्लॉग पर भी इस वर्ष राजनीति और समाज से संवंधित अत्यंत सार्थक और सकारात्मक पोस्ट पढ़ने को मिले हैं ।

........विश्लेषण अभी जारी है,फिर मिलते हैं लेकर वर्ष-2011 की कुछ और झलकियाँ 

मंगलवार, 24 जनवरी 2012

परिकल्पना ब्लॉग विश्लेषण-2011 (भाग-5 )


ब्लॉग पर सृजन-कर्म और विमर्श को
नया आकाश मिला वर्ष-2011 में.....

"अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता का माध्यम है ब्लॉग,वास्तविक, त्वरित, और कम खर्चीली स्वतंत्रता जैसी एक ब्लॉग दे सकता है, वह किसी अन्य माध्यम में उपलब्ध नहीं है। मैं हिन्दी ब्लॉगिंग के भविष्य को लेकर आशान्वित हूँ और उत्साहित भी। हिन्दी ब्लॉगिंग का भविष्य उज्जवल है और इसमें अनेक संभावनाएं है।"
समीर लाल "समीर", वरिष्ठ ब्लॉगर
गतांक से आगे......


हिन्दीभाषी किसी मुद्दे पर अपने विचार व्यक्त करने, भड़ास निकालने, दैनिक डायरी लिखने, खेती-किसानी की बात करने से लेकर तमाम तरह के विषयों पर लिख रहे हैं। अपनी इसी खूबी के कारण इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का माध्यम कहा जाता है क्योंकि यहाँ पर आप कुछ भी और कितना भी लिखिए, कोई रोकने वाला नहीं है। विगत भाग में मैंने साहित्यिक गतिविधियों पर खुलकर बातें की, किन्तु कुछ और कहना शेष रह गया था, चलिए आगे बढ़ते हैं ........

हाइकु गतिविधियाँसाहित्य की बात चल रही है तो आईए सबसे पहले आज हम चलते हैं एक ऐसे ब्लॉग पर जो समग्र साहित्य का त्रैमासिक संकलन है, नाम है अविराम अविराम का प्रकाशन सामान्यतः आवरण सहित 52 पृष्ठों में प्रकाशित होता है। यह ब्लॉग जुलाई-2011  से अस्तित्व में आया है । हिंदी में हाईकू लेखन से संवंधित गतिविधियों पर भी ब्लॉग उपलब्ध है, जिसका नाम है हाईकू दर्पण 

आधुनिक हिन्दी कहानी के पितामह प्रेमचन्द की रचना-दृष्टि, विभिन्न साहित्य रूपों में, अभिव्यक्त हुई। वह बहुमुखी प्रतिभा संपन्न साहित्यकार थे। उन्होंने उपन्यास, कहानी, नाटक, समीक्षा, लेख, सम्पादकीय, संस्मरण आदि अनेक विधाओं में साहित्य की सृष्टि की किन्तु प्रमुख रूप से वह कथाकार हैं। 27 फरवरी 2011 को अवनीश सिंह  के द्वारा संचालित  प्रेमचंद के पाठकों को समर्पित एक ब्लॉग आया । इनके और भी कई ब्लॉग है जैसे विमर्श, अनकही बातें आदि । 
साहित्य की बात हो और मुहल्ला लाईव की चर्चा न हो तो सबकुछ अधूरा-अधूरा सा लगता है । वर्ष-2011 में इस ब्लॉग पर साहित्यिक गतिविधियों से संवंधित अनेकानेक रिपोर्ताज और अन्य सामग्रियां प्रकाशित हुई । अविनाश दास ने इस ब्लॉग की शुरुआत वर्ष-2006 में ब्लॉग स्पॉट  पर की थी,  जिसे बाद में उन्होंने इसे सामूहिक ब्लॉग में परिवर्तित कर दिया   


जहां तक व्यक्तिगत ब्लॉग पर साहित्य संचयन का प्रश्न है मनोज भारती के दो ब्लॉग प्रशंसनीय है,पहला गूँज अनुगूंज जो अध्यातिम विषयों पर केन्द्रित है और दूसरा बूँद बूँद इतिहास । इसमें पायेंगे आप हिंदी साहित्य के इतिहास की रूपरेखा और एक ही स्थान पर हिंदी की रचनाओं, लेखकों और उसकी विभिन्न धाराओं की प्रवृतियों सारगर्भित निचोड़  नवीन सी. चतुर्वेदी का ब्लॉग ठाले बैठे हिंदी का एक ऐसा अनोखा ब्लॉग है,जहां छंद को जीवंत बनाए रखा गया है    इस ब्लॉग पर अनुष्टुप छंद,अमृत ध्वनि छंद,उल्लाला छंद,ककुभ छंद,कर्ण छंद,कुण्डलिया छंद,गीतिका छंद,घनाक्षरी छंद,चवपैया छंद,चौपाई छंद,छप्पय छंद,ताटंक छंद,दुर्मिल सवैया,दोहा छंद,नव-कुण्डलिया छंद,पञ्चचामर छन्द,बरवै छंद,भुजंग प्रयात छंद,मत्तगयन्द सवैया,मानव छंद,मालिनी सवैया,रुचिरा छंद,रोला छंद,विधाता छंद,शोकहर छंद,सरसी छंद,सांगोपांग सिंहावलोकन छंद,सार / ललित छंद,सुन्दरी सवैया,सोरठा छंद,हरिगीतिका छंद आदि छन्द अनुसार पढ़ सकते हैं   हिंदी में प्रकाशित साहित्यिक पत्रिकाओं की संक्षिप्त समीक्षा उससे संबंधित जानकारियों का विस्तृत आकाश है एक ब्लॉग पर नाम है कथा चक्र। इस ब्लॉग के संचालक हैं अखिलेश शुक्ल।


एक ऐसा ब्लॉगर जिसने ब्लॉग पर वर्ष-2009  - 2010  में सर्वाधिक पोस्ट लिखने की उपलब्धि हासिल की,किन्तु वर्ष-2011  में ये पिछड़ गए और यह श्रेय गया डा. राजेन्द्र तेला निरंतर के हिस्से  ने इस वर्ष अपने व्यक्तिगत ब्लॉग निरंतर की कलम से पर एक वर्ष में सर्वाधिक पोस्ट (1669 )लिखने का कीर्तिमान बनाया है ।
उच्चारण
उल्लेखनीय है कि हिंदी ब्लॉगिंग को साहित्य के सन्निकट लाने वालों में एक महत्वपूर्ण नाम है डा. रूप चंद शास्त्री मयंक का, जिन्होनें 21 जनवरी, 2009 को हिन्दी ब्लॉगिंग की दुनिया में अपना कदम बढ़ाया था। उस समय उन्होंने अपना ब्लॉग उच्चारणके नाम से बनाया था, जिस पर अबतक 2000 से ज्यादा रचनाएँ पोस्ट की जा चुकी है और इस ब्लॉग के लगभग 400 से ज्यादा समर्थक हैं। उसी वर्ष 19 फरवरी को इन्होनें “अमर भारती” के नाम से एक और ब्लॉग बनाया,जिस पर 200  से ज्यादा पोस्ट अस्तित्व में है ।इसके बाद इन्होनें 30 अप्रैल, 2009 में “शब्दों के दंगल” के नाम से गद्य का एक ब्लॉग बनाया। जिस पर अब तक 190 पोस्ट लग चुकी हैं और समर्थकों की संख्या 150  से   ज्यादा  हो गई है।इसके बाद इन्होनें “मयंक की डायरी के नाम से एक और ब्लॉग बनाया। 4 नवम्बर, 2009 को एक ब्लॉग इन्होनें ब्लॉगर मित्रों के नाम पते सहेजने के लिए डायरेक्ट्री के नाम से बनाया। लेकिन उस पर 100 से अधिक नाम-पते नहीं मिल सके और इसका नाम बाल चर्चा मंच रख दिया। लेकिन बाल साहित्य के बहुत ही थोड़े सले ब्लॉग थे और उनमें से अधिकांश पर नियमित पोस्टें लहीं लगती थीं। इस लिए इन्होनें अब इसका नाम “धरा के रंग” रख दिया है।इसके बाद इन्होनें चर्चाकार के रूप में ब्लॉगिंग की दुनिया में पदार्पण किया और चर्चा मंच पर "दिल है कि मानता नही" के नाम से पहली चर्चा 18 दिसम्बर, 2009 को लगाई। चर्चा मंच के आज की तारीख में 750 समर्थक है और चर्चाओं का आँकड़ा 760 को पार कर गया है। 9 मई, 2010 को इन्होनें बालसाहित्य का एक ब्लॉग बनाया और इसको नाम दिया नन्हे सुमन। जिस पर 150  से ज्यादा पोस्ट और समर्थकों की संख्या 85  से ज्यादा  है।

विशुद्ध साहित्यिक रचनाओं के सरोवर में गहरे उतरने को विवश करता एक ब्लॉग है कर्मनाशा । पूरे वर्ष सिद्धेश्वर ने कुछ अच्छी कविताओं के हिंदी अनुवाद प्रस्तुत किए  जिसमें प्रमुख है पोलिश कविता की समृद्ध और गौरवमयी परम्परा  की एक महत्वपूर्ण कड़ी  के रूप में विद्यमान  हालीना पोस्वियातोव्सका ,  पीटर ओड्स   , कैरोलिन कीज़र  , वेरा पावलोवा, निज़ार क़ब्बानी,बेतुके वक्त, ममांग दाई,ग्राज़्यना क्रोस्तोवस्का, टॉमस ट्रांसट्रोमर,रवीन्द्रनाथ टैगोर आदि की कविताओं के अनुवाद । इसके अलावा इस वर्ष  सिद्धेश्वर की लिखी कुछ वेहतरीन कवितायें पढ़ने को मिली है 


इसके अलावा  सतीश सक्सेना (मेरे गीत),राज भाटिया (पराया देश, छोटी छोटी बातें), इंदु पुरी (उद्धवजी), अंजु चौधरी (अपनों का साथ), वंदना गुप्ता (जख्म…जो फूलों ने दिये, एक प्रयास), महफूज अली (लेखनी…, Glimpse of Soul), यौगेन्द्र मौदगिल (हरियाणा एक्सप्रैस), अलबेला खत्री (हास्य व्यंग्य, भजन वन्दन, मुक्तक दोहे), संजय अनेजा (मो सम कौन कुटिल खल…?), राजीव तनेजा (हँसते रहो, जरा हट के-लाफ्टर के फटके), जाट देवता (संदीप पवाँर) (जाट देवता का सफर), संजय भास्कर (आदत…मुस्कुराने की), कौशल मिश्रा (जय बाबा बनारस), दीपक डुडेजा (दीपक बाबा की बक बक, मेरी नजर से…), आशुतोष तिवारी (आशुतोष की कलम से), मुकेश कुमार सिन्हा (मेरी कविताओं का संग्रह, जिन्दगी की राहें), पद्मसिंह (पद्मावली), सुशील गुप्ता (मेरे विचार मेरे ख्याल), राकेश कुमार (मनसा वाचा कर्मणा), सर्जना शर्मा (रसबतिया), शाहनवाज़ (प्रेम रस), अजय कुमार झा (झा जी कहिन),कनिष्क कश्यप (ब्लॉग प्रहरी), केवल राम (चलते-चलते, धर्म और दर्शन), ताऊ रामपुरिया (ताऊ डोट इन) और राहुल सिंह ( सिंहावलोकन ) ने भी इस वर्ष कतिपय साहित्यिक रचनाओं से पाठकों का ध्यान आकर्षित किया है 


इसके अलावा सुबीर संवाद सेवा ,कवि कुमार अम्बुज, अपर्णा मनोज, मृत्युबोध, नई बात ,मेरी लेखनी मेरे विचार , अजित गुप्ता का कोना, मन का पाखी, कलम,अंदाज़े मेरा , मो सम कौन कुटिल खल, काव्यांजलि, फुहार   आदि पर भी उत्कृष्ट साहित्यिक सामग्री प्रस्तुत की गई है इस वर्ष

चलते-चलते एक और महत्वपूर्ण ब्लॉग का जिक्र करना चाहूंगा। ब्लॉग पर ब्लॉगरों का परिचय देने के उद्देश्य से राजीव कुलश्रेष्ठ ने वर्ष-2010 में " ब्लॉग वर्ल्ड.कॉम " ब्लॉग की शुरुआत की,किन्तु इस वर्ष यह ब्लॉग कुछ ज्यादा मुखर रहा  इसपर वे लगभग 100 से अधिक ब्लॉगर्स का परिचय पोस्ट के रूप में प्रकशित कर चुके हैं। .उनके द्वारा करवाए जाने वाले परिचय की ख़ास बात यह है कि वह ब्लॉगर द्वारा ब्लॉग पर की गयी पोस्ट पर आधारित होता है और वहां संवंधित ब्लॉगर के सभी ब्लॉगों का जिक्र भी होता है  साथ ही संकलित लेकिन बहुत ही अर्थपूर्ण और सार्थक टिप्पणी भी ब्लॉगर्स के लेखन और व्यक्तित्व पर भी की जाती है इस ब्लॉग पर उनके अपने परिचय के बाद पहला परिचय के रूप में दर्शन कौर धानोए का परिचयात्मक पोस्ट होता है।इस ब्लॉग पर अनेकानेक ब्लॉग के लिंक भी दिए गए हैं । कुलमिलाकर राजीव कुलश्रेष्ठ का यह प्रयास सराहनीय है 
                      ........विश्लेषण अभी जारी है,फिर मिलते हैं लेकर वर्ष-२०११ की कुछ और झलकियाँ

शनिवार, 21 जनवरी 2012

परिकल्पना ब्लॉग विश्लेषण-2011 (भाग-4)

हिंदी ब्लॉगिंग में सृजन की व्यापक 
जिजीविषा देखी गयी इस वर्ष..

"अब हिंदी साहित्य से जुड़े ब्लॉग दुनिया भर में पढ़े जा रहे हैं। देश विदेश में हिंदी प्रेमी व रचनाकार इन्हें लिख रहे हैं। इन पर व्यक्त किए गए विचार केवल ब्लॉगर्स के विचार न होकर हिंदी की साहित्य की नवीन अवधारणा का प्रतीक बन रहा है। "
 अखिलेश शुक्ल (संपादक : कथा चक्र )
गतांक से आगे........


इस वर्ष ब्लॉग पर हिंदी साहित्य से संवंधित कतिपय सामग्रियां देखी गयी । हिंदी साहित्य से इस वर्ष अनेक ब्लॉग जुड़े और जो पूर्व से जुड़े हैं वे प्रतिबद्धता के साथ लगातार हिंदी में साहित्यिक सामग्रियां उपलब्ध कराते रहे । हालांकि  ब्लॉग पर लगभग प्रत्येक विधा का साहित्य उपलब्ध है, लेकिन यहां कविता व कहानी के साथ साथ तत्कालीन साहित्यिक जानकारी के ब्लॉग ही अधिक हैं। यहाँ यह कहना मैं मुनासिब समझ रहा हूँ कि ब्लॉग की तुलना में इस वर्ष सोशल नेटवर्किग से जुड़ी विभिन्न वेबसाइटें भी साहित्यकारों-लेखकों को एक दूसरे के क़रीब लायी  हैं। इनके माध्यम से भी हिंदी साहित्य से जुड़े सभी उपयोगकर्त्ता एक दूसरे के ब्लॉग पर भ्रमण करते देखे गए, जिससे उन्हें एक दूसरे के द्वारा किए गए लेखन के संबंध में लगातार जानकारी मिलती रही और वे साहित्य के सरोवर में डुबकिया लगाते रहे । इसलिए यह सच है कि इस वर्ष ब्लॉग के साथ-साथ सोशल नेटवर्किग साइट भी साहित्यकारों-रचनाकारों के सुख-दुख बांटने का बाखूबी दायित्व निभाया है ।

साहित्य का भूगोल बहुत विशाल है। इसे न तो किसी सीमा में बाँधना उचित कहा जाएगा और न ही कालखंड में समेटना, फिर भी बीते एक साल में ब्लॉग पर हिंदी साहित्य ने कहाँ तक अपनी विकास यात्रा तय की है, कमोबेश उस पर दृष्टिपात तो किया ही जा सकता है। इसी कड़ी में विशुद्ध साहित्यिक सन्दर्भों को सहेजने में पूरे वर्ष मशगूल रहा प्रभात रंजन का ब्लॉग जानकी पुल। हिंदी ब्लॉगिंग में साहित्य को प्रतिष्ठापित करने की दिशा में क्रान्ति का प्रतीक रहा ब्लॉग हिंद युग्म । रचनाकारसाहित्य शिल्पी और  विचार मीमांशा ने अपनी स्तरीयता को बनाए रखा इस वर्ष  नारी का कविता ब्लॉगनारी ,हिंदी साहित्य मंच,हिंदी साहित्यसाहित्य,साहित्य वैभव ,मोहल्ला लाईवसाखी,वटवृक्ष, सृजन (सुरेश यादव ), वाटिका,मंथन, शब्द सभागारराजभाषालोकसंघर्ष पत्रिकाराजभाषा हिंदी ,गवाक्षकाव्य कल्पनापरिकल्पना  ब्लॉगोत्सव साहित्यांजलि, कुछ मेरी कलम से,चोखेर वालीनवोत्पल ,युवा मन , सुबीर संवाद सेवाअपनी हिंदी , हथकढ हिंदी कुञ्ज , पढ़ते पढ़ते ,तनहा फलकआवाज़ , नयी बातकारवां , सोचालयपुरवाई ,एक शाम मेरे नाम ,साहित्य सेतु , कबीरा खडा बाज़ार में आदि पूरी निर्भीकता के साथ  साहित्य की खुशबू बिखेरते रहे वर्ष भर । वहीँ एक और ई पत्रिका हमारी वाणी इस वर्ष अस्तित्व में आई और काल कलवित भी हो गयी 


ब्लॉग पर सक्रीय प्रतिष्ठित साहित्यकारों में दिविक रमेश और प्रेम जनमेजय इस वर्ष ज्यादा सक्रिय दिखे, प्रेम जनमेजय पर केन्द्रित इस वर्ष चेतना का भी अंक भी आया, अरविन्द श्रीवास्तव का ब्लॉग जनशब्द इस वर्ष काफी मुखर रहा, जबकि महावीर शर्मा के निधन के बाद महावीर पूरी तरह अनियमित रहा,जबकि आजकल  दीपक मशाल  इसे संयोजित करने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं ।  हास्य पर केन्द्रित ब्लॉग की श्रेणी में इस वर्ष भी अग्रणी रहे अशोक चक्रधर । ये हिंदी के मंचीय कवियों में से एक हैं। हास्य की विधा के लिये इनकी लेखनी जानी जाती है। कवि सम्मेलनों की वाचिक परंपरा को घर घर में पहुँचाने का श्रेय गोपालदास नीरज, शैल चतुर्वेदी, सुरेंद्र शर्मा, ओमप्रकाश आदित्य, कुमार विश्वास आदि के साथ-साथ इन्हें भी जाता है। ब्लोगिंग में वर्ष-2006 से सक्रिय हैं ….इनका प्रमुख ब्लॉग है चक्रधर का चक्कलस 


अशोक कुमार पाण्डेय का व्यक्तिगत ब्लॉग "असुविधा" और सामूहिक ब्लॉग "कबाडखाना इस वर्ष विगत वर्षों की तुलना में ज्यादा प्रखर दिखा।  उल्लेखनीय है कि युवा कवि अशोक कुमार पाण्डेय ग्वालियर में रहते हैं। सामाजिक-सांस्कृतिक क्षेत्र में सक्रिय अशोक कविताओं के साथ-साथ आर्थिक विषयों पर आलेख लिखते हैं,अनुवाद करते हैं,समीक्षायें करते हैं और साथ ही इधर कुछ कहानियां भी लिखी हैं। हिन्दी की अनेक प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में प्रकाशित अशोक अपनी समझौताहीन वैचारिक प्रतिबद्धता के लिये जाने जाते हैं। उनकी शीघ्र प्रकाश्य पुस्तकों में शिल्पायन से कविताओं का संकलन 'तुम्हारी दुनिया में इस तरह ' और आर्थिक विषयों पर लिखे आलेखों का संग्रह 'शोषण के अभयारण्य' तथा संवाद प्रकाशन से 'मार्क्स : जीवन तथा विचार' शामिल हैं। इसके अलावा वह चे ग्वेरा की एक किताब का अनुवाद भी कर रहे हैं। विनीत कुमार ने भी इस वर्ष ब्लॉगिंग में चार वर्ष का सफ़र पूरा कर लिया,वहीँ अफलातून ने पांच वर्ष पूरे किये ।


राजभाषा हिंदी , Hindizen - निशांत का हिंदीज़ेन ब्लॉग , अपनी, उनकी, सबकी बातें ,एक आलसी का चिठ्ठा , सोचालय... ,मेरी मानसिक हलचल ,स्वप्न मेरे................,फुरसतिया , शिप्रा की लहरें , मल्हार मल्हार , chavanni chap (चवन्नी चैप) ,शरद कोकास ,शरद कोकास ,दफ़्‌अतन , निर्मल-आनन्द ,मौलश्री ,कविताएँ और कवि भी.. ,aradhana-आराधना का ब्लॉगइलाहाबादी अड्डा  आदि पर भी इस वर्ष  सर्वाधिक सार्थक पोस्ट देखे गए,वहीँ बना रहे बनारस पर इस वर्ष 146  पोस्ट पढ़ने को मिले, प्रत्येक पोस्ट गंभीर साहित्यिक विमर्श और आम जन जीवन पर आधारित थे 

वर्ष-2011 में कुछ ऐसे ब्लॉग से मैं रूबरू हुआ जिसमें सृजन की जिजीविषा देखी गयी वहीं कुछ सार्थक करने की ख्वाहिश भी जिनमें जागरूकता और सक्रियता भी देखी गयी तथा जीवन के उद्देश्यों को समझते हुए अनुकूल कार्य करते रहने की प्रवृति भी   इन्हीं उद्देश्यों के साथ हिंदी की मूलधारा के साहित्य का प्रतिनिधित्व करने वाला ब्लॉग  "समालोचन"  हिंदी ब्लॉगिंग के स्तर को काफी ऊपर उठाया इस वर्ष ।उल्लेखनीय है कि हिंदी के युवा साहित्यकार , कवि, आलोचकों का युवा ब्लॉग है यह 


 इस वर्ष ज्यादा सार्थक और ज्यादा सकारात्मक नज़र आये शब्दों के सर्जक अजीत वाडनेकर , जिनका ब्लॉग है – शब्दों का सफर । सिद्धेश्वर ने अपने ब्लॉग  कर्मनाशा पर शब्दों की जादूगरी से मानव जीवन से जुड़े विविध विषयों को मन के परिप्रेक्ष्य में दिखाने का महत्वपूर्ण कार्य किया इस वर्ष, वहीँ  मनोज पटेल विश्व भर के कवियों का बहुत बढ़िया अनुवाद करते रहे  ब्लॉग  "पढ़ते पढ़ते" पर  अपनी माटी पर जिस तरह की सामग्री प्रस्तुत किये हैं मानिक, वह प्रशंसनीय है ।  कथा चक्र पर अखिलेश लगातार पत्र पत्रिकाओं और पुस्तकों के प्रकाशन की सूचना देते रहे  


साथ ही विगत वर्ष दो महत्वपूर्ण साहित्यिक किन्तु व्यक्तिगत ब्लॉग आये थे जिसमें मनोज कुमार का ब्लॉग  विचार और  कुअंर कुसुमेश का नया ब्लॉग शामिल था , दोनों ब्लॉग पर इस वर्ष भी सृजनात्मक अभिव्यक्ति की सार्थक प्रस्तुति देखी गयी।  गाँधी जी से सम्बंधित सर्वाधिक उत्कृष्ट सामग्रियां परोसने का महत्वपूर्ण कार्य किया इस वर्ष विचार ने। संभवत: इस प्रकार की दुर्लभ सामग्री पुस्तकों में भी कम ही है इसके अलावा उनका ब्लॉग राजभाषा हिंदी भी अनेकानेक साहत्यिक चर्चाओं का केंद्र बना रहा 


श्याम बिहारी श्यामल का ब्लॉग भी इस वर्ष महत्वपूर्ण साहित्यिक सामग्रियां अंतरजाल को समर्पित किया । इसके अलावा और ब्लॉग भी  हैं जैसे "साखी", प्रतिलिपिसबदकाव्य प्रसंगअनुनाद आदि जिनकी  प्रस्तुतियों ने लगातार अचंभित किया इस वर्ष । इस वर्ष सतीश पंचम के सफ़ेद घर पर व्यंग्य के नए-नए प्रयोग हुए,अविनाश वाचस्पति टिप्पणियों का रोना रोते रहे, जबकि ठेलुआते हुए प्रमोद तांबट ने भी इस वर्ष ब्लॉगिंग में दो वर्ष पूरे कर लिए 

वर्ष-2010 के द्वितीय सप्ताहांत में आया सुशील बाकलीवाल का ब्लॉग नज़रिया इस वर्ष पूरे रंग में दिखा, वहीँ  अमरेन्द्र त्रिपाठी के ब्लॉग  कुछ औरों की , कुछ अपनी, पर वैसे तो विगत वर्ष की तरह इस वर्ष भी कुछ ख़ास हलचल नहीं देखा गया,किन्तु कुछ गंभीर विमर्श को जन्म देने वाले पोस्ट अवश्य देखे गए  जबकि क्रिएटिव मंच-Creative Manch …पर  सृजनशीलता का सच्चा सुख अनुभव किया गया इस वर्ष । इस ब्लॉग के मुख्य संयोजक हैं प्रकाश गोविन्द और उनके प्रमुख सहयोगी हैं मानवी श्रेष्ठाअनंत , श्रद्धा जैन ,शोभना चौधरी , शुभम जैन और रोशनी साहू । इस ब्लॉग से जुड़े चिट्ठाकारों का शरू से यह प्रयास रहा है कि कुछ सार्थक करने का प्रयास किया जाए


छत्तीसगढ़ के रायपुर से प्रकाशित होने वाली चर्चित त्रैमासिक पत्रिका”सद्भावना दर्पण मार्च-2011  से  मासिक हो गयी ।  तीस सालों से साहित्य और पत्रकारिता में सक्रिय गिरीश पंकज के संपादन में सन 1996  से प्रकाशित होने वाली इस पत्रिका में भारतीय एवं विश्व साहित्य का हिंदी अनुवाद प्रकाशित होता है अब तक इस पत्रिका ने पाकिस्तानी, बांगलादेशीय, तेलुगु, मलयालम,कन्नड़, मराठी, छत्तीसगढ़ी आदि भाषाओँ के विशेषांकों का प्रकाशन किया है दिल्ली, भोपाल, नाथद्वारा आदि दस स्थानों में पुरस्कृत हो चुकी पत्रिका ”’सद्भावना दर्पण” मार्च से लगातार प्रकाशित हो रही है  गिरीश पंकज से जो एक बहुआयामी रचनाकार है । ये एक साथ व्यंग्यकार, उपन्यासकार, ग़ज़लकार एवं प्रख्यात पत्रकार हैं । देश एवं विदेश में सम्मानित । युवाओं के प्रेरणास्त्रोत । सद्भावना, राष्ट्रीय एकता, सामाजिक सद्भाव के लिए एक विशिष्ट स्थान रखने वाले गिरीश पंकज को पढ़ना अपने आप में एक विशिष्ट अनुभव से गुजरना है ।



कहा गया है कि समाज वही आगे बढ़ता है जिसमें भविष्‍य की सोच हो, चिन्‍तन हो । इस सोच को चिंतन को मूर्तरूप देने की दिशा में सक्रिय हैं अनेक वेब पत्रिकाएं। इस वर्ष साहित्यिक पत्रिकाओं और लघु पत्रिकाओं ने भी अपनी छाप छोड़ी हैं। तद्भव, कथादेश, हंस, वागर्थ, वर्तमान साहित्य आदि ने अपने अलग-अलग अंकों में ऐसी सामग्री प्रकाशित की है जो कहीं न कहीं साहित्यकारों और पाठकों को मथती रही है। इनमें से तद्भवहंस और वर्तमान साहित्य ने अपनी उपस्थिति विश्वजाल पर भी दर्ज की, जो हिंदी साहित्य को विश्वव्यापी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

इस वर्ष हिंदी ब्लॉगिंग और साहित्य के बीच सेतु निर्माण के उद्देश्य से पहली बार अप्रैल माह से रश्मि प्रभा के संपादन में वटवृक्ष (त्रैमासिक ब्लॉग पत्रिका ) का प्रकाशन शुरू हुआ। ब्लॉग पर साहित्य को समृद्ध करने की दिशा में इस वर्ष ज्यादा मुखर दिखे दो नाम कोलकाता के मनोज कुमार और पुणे की रश्मि प्रभा । मनोज कुमार ने जहां मनोज,राजभाषा हिंदी आदि ब्लॉगों पर करण समस्तीपुरी,हरीश प्रकाश गुप्त आदि मित्रों के सहयोग से पूरे वर्ष  दुर्लभ साहित्य को सहेजने का महत्वपूर्ण कार्य किया,वहीँ रश्मि प्रभा ने  मेरी भावनाएं,वटवृक्ष आदि ब्लॉगों के माध्यम से नयी-नयी साहित्यिक प्रतिभाओं को मुख्यधारा में लाने महत्वपूर्ण कार्य किया । साहित्यको ब्लॉगिंग से जोड़ने वाली त्रैमासिक पत्रिका वटवृक्ष का वह इस वर्ष से संपादन भी कर रही हैं । ब्लॉग पर हिंदी को समृद्ध करने वालों में एक नाम डॉ0 कविता वाचक्नवी का है जिन्होंने हिंदी भारत के माध्यम से हिंदी को समृद्ध करने की समर्पित सेवा कर रही हैं ।

इन्टरनेट पर उपलब्ध हिंदी पत्रिकाओ में अनुभूति,अभिव्यक्ति,प्रवक्‍ता समाचार-विचार वेबपोर्टल,नव्या अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका,पाखी हिंदी पत्रिका,अरगला इक्कीसवीं सदी की जनसंवेदना एवं हिन्दी साहित्य की त्रैमासिक पत्रिका,तरकश - हिन्दी का लोकप्रिय पोर्टल,एलेक्ट्रॉनिकी -एलेक्ट्रॉनिक्स, कम्प्यूटर, विज्ञान एवं नयी तकनीक की मासिक पत्रिका, अनुरोध : भारतीय भाषाओं के प्रतिष्ठापन का अनुरोध,ताप्तीलोककैफे हिन्दीहंस - हिन्दी कथा मासिक,अक्षय जीवन - आरोग्य मासिक पत्रिका,अक्षर पर्व - साहित्यिक वैचारिक मासिक,पर्यावरण डाइजेस्ट - पर्यावरण चेतना का हिन्दी मासिक,ड्रीम २०४७ - विज्ञान प्रसार की मासिक पत्रिका (पीडीएफ),गर्भनाल ( प्रकाशक : श्री आत्माराम शर्मा ),मीडिया विमर्श,वागर्थ : साहित्य और संस्कृति का समग्र मासिक,काव्यालय,कलायन पत्रिका,निरन्तर - अब सामयिकी जालपत्रिका में समाहित,भारत दर्शन - न्यूजीलैण्ड से हिन्दी की साहित्यिक पत्रिका,सरस्वती(कनाडा से),अन्यथा - magazine of Friends from India in America,परिचय- सायप्रस से अप्रवासी भारतीयों की हिन्दी पत्रिका,Hindi Nest dot Comतद्भवउद्गम : हिन्दी की साहित्यिक मासिका,कृत्या : कविताओं की पत्रिका, Attahaas : हास्य पत्रिका, रंगवार्ता : विविध कलारुपों का मासिक,क्षितिज - त्रैमासिक हिन्दी साहित्यिक पत्रिका,इन्द्रधनुष इण्डिया : साहित्य और प्रकृति को समर्पित,सार-संसार : विदेशी भाषाओं से सीधे हिंदी में अनूदित साहित्य की त्रैमासिक हिन्दी पत्रिका,लेखनी - हिन्दी और अंग्रेजी की मासिक जाल-पत्रिका,मधुमती - राजस्थान साहित्य अकादमी की मासिक पत्रिका,साहित्य वैभव - संघर्षशील रचनाकारों का राष्ट्रीय प्रतिनिधि,विश्वा,सनातन प्रभात,हम समवेत,वाङ्मय - त्रैमासिक हिन्दी पत्रिका,समाज विकास - अखिल भारतीय मारवाडी सम्मेलन की पत्रिका,गृह सहेली,साहित्य कुंज - पाक्षिक पत्रिका,लोकमंच,उर्वशी - सहित्य और शोध के लिये समर्पित़ डा०राजेश श्रीवास्तव शम्बर द्वारा सम्पादित वेब पत्रिका प्रतिमाह प्रकाशित,संस्कृति - सांस्कृतिक विचारों की प्रतिनिधि अर्द्धवार्षिक पत्रिका, प्रेरणा , जनतंत्र , समयांतर , में केवल साहित्य कुञ्ज अनियमित रही , शेष सभी पत्रिकाओं ने अपनी सक्रियता को बनाए रखा 

आज भले ही हिंदी के साहित्यकारों की पहुंच ब्लॉगों पर लगभग 10 प्रतिशत के आसपास ही है। लेकिन इंटरनेट उपयोगकर्त्ताओं की बढ़ती संख्या आस्वस्त करती है कि हिंदी का दायरा अब देश की सीमाएं लांघकर दुनिया भर में अपनी पैठ बना रहा है । अनेक सामूहिक ब्लॉग साहित्यकारों-लेखकों को एक दूसरे के क़रीब ला रहा हैं। फलत: उन्हें एक दूसरे के द्वारा किए गए लेखन के संबंध में जानकारी मिलती है। इस वर्ष साहित्यकारों -संस्कृतिकर्मियों की विश्राम स्थली के रूप में विख्यात इन वेब पत्रिकाओं के अतिरिक्त साहित्य शिल्पी पर अन्य सभी वेब पत्रिकाओं की तुलना में अत्यंत मोहक प्रस्तुति देखी गयी   जय प्रकाश मानस द्वारा संपादित  सृजनगाथा पत्रिका पूरी दृढ़ता के साथ हिंदी साहित्य को समृद्ध करने और साहित्यिक कृतियों को प्रकाशित करने की दिशा में सक्रिय रही इस वर्ष। वहीँ पंकज श्याम त्रिवेदी द्वारा संपादित वेब पत्रिका नव्या ने इस वर्ष से साहित्यिक प्रकाशन का कार्य भी शुरू किया है और इस प्रकाशन के अंतर्गत पहली पुस्तक क्या प्यार इसी को कहते हैं प्रकाशित किया गया,जिसके लेखक हैं श्याम कोरी उदय 


वर्ष-2011 में जिन व्यक्तिगत ब्लॉग पर सृजनधर्मिता काफी देखी गयी उसमें प्रमुख है-उड़न तश्तरी,फुरसतिया, सद्भावना दर्पण, आखर कलश,.....मेरी भावनाएं,  कुछ कहानियां कुछ नज्में,  गीत...मेरी अनुभूतियाँ , बिखरे मोती, स्पंदन, एक सवाल तुम करो, नन्हा मन, कविता, नज्मों की सौगात, ठाले बैठे , वीर बहुटी , अनुशील,शब्द शिखर, काव्य कल्पना, अफरा-तफरी, देखिये एक नज़र इधर भी , कविता रावत ,कुछ मेरी कलम से, अमृता प्रीतम की याद में ,सदा ,ज्ञान वाणी ,गीत मेरे ,दो बातें एक एहसास की ,न दैन्यं न पलायनम , मिसफिट सीधी बात ,दिशाएँ ,अर्पित सुमन, बाबरा मन , कोना एक रुबाई का ,सत्यार्थ मित्र,संवाद ,पारुल चाँद पुखराज का,ज़िन्दगी कि आरज़ू , मसि कागद ,मेरे विचारों की दुनिया.. हमराही , गुस्ताख आदि ।

इस वर्ष साहित्य को समर्पित व्यक्तिगत ब्लॉग के क्रम में एक और ब्लॉग ने पाठकों का ध्यान खींचा वह है शब्द सृजन की ओर,जिसके संचालक है  के के यादव। श्री यादव जून -2008 से सक्रिय ब्लॉगिंग से जुड़े हैं । इनका एक और ब्लॉग है डाकिया डाक लाया । यह ब्लॉग विषय आधारित है तथा डाक विभाग के अनेकानेक सुखद संस्मरणों से जुडा है । इसके अलावा शब्द शिखरउत्सव के रंगसप्तरंगी प्रेम और बाल दुनिया ब्लॉग की संचालिका आकांक्षा यादव पूर्व की तुलना में कम सक्रिय दिखीं ।जबकि राम शिवमूर्ति यादव वर्ष -2011 में अपनी सार्थक और सकारात्मक गतिविधियों से हिंदी ब्लॉगजगत का ध्यान खींचने में सफल रहे हैं । वहीँ 01 सितंबर -2009 से हिंदी ब्लॉगिंग में आये प्रतिभाशाली ब्लॉगर  मानव मेहता ने इस वर्ष भी अपनी प्रतिभा और योग्यता के बल पर अपनी एक अलग पहचान बनाने में सफल हुए हैं ।  सुमन कपूर यानी सुमन मीत पूरे वर्ष भर अपनी सुन्दर और भावपूर्ण रचनाओं से हिंदी ब्लॉगजगत को अभिसिंचित करती रही । मई-2007 से सक्रिय ब्लॉगिंग में कार्यरत वन्दना इस वर्ष काफी लोकप्रिय रही, इनके तीन ब्लॉग क्रमश: ज़िन्दगी एक खामोश सफ़र एक प्रयास और ज़ख्म जो फूलों ने दिए हैं ।इस क्रम में एक और प्रमुख नाम है विजय कुमार सपत्ति , जो वर्ष-२००८ से सक्रिय ब्लोगिंग में हैं । इनका प्रमुख ब्लॉग है ख़्वाबों के दामन में , कविताओं के मन से ,आर्ट बाई विजय कुमार सपत्ति , भारतीय कॉमिक्स , अंतर्यात्रा , हृदयम आदि है ।कोमल शब्दों के साथ हिंदी ब्लॉगजगत की सतत सेवा करने वाली संगीता स्वरुप गीत भी इस वर्ष काफी चर्चा में रही।  जबकि काव्य रचना में इस वर्ष अग्रणी रहीं रंजना उर्फ़ रंजू भाटिया । कथा कहानी में इस वर्ष संगीता पूरी भी काफी सक्रिय दिखीं । जबकि प्रतिभाशाली लेखन में सर्वाधिक योगदान देने वालों में डा. सुभाष राय,दिगंबर नासवा और अलवेला खत्री अग्रणी दिखे इस वर्ष । जबकि व्यंग्य को समर्पित ठहाका ब्लॉग इस वर्ष भी अनियमित रहा इनके सिवा अरुण चन्द्र रॉय  भी इस वर्ष काफी सक्रिय देखे गए श्री रॉय हिंदी भाषा और विभिन्न विषयों पर अच्छी पकड़ रखते हैं और ब्लोगिंग के माध्यम से अपनी अभिव्यक्ति को धार देने की दिशा में लगातार सक्रिय  भी हैं ।

कुल मिलाकर यही कहा जा सकता है कि ब्लॉग पर साहित्य की गतिविधियों से तपी जमीन को कुछ ठंडक देने का काम हुआ , लेकिन विकासक्रम की दृष्टि से अन्य भाषाओं की तुलना में बहुत संतोषप्रद नहीं कहा जा सकता । हिंदी ब्लॉगिंग की आठ वर्षों की इस यात्रा में अमूमन यही देखा गया कि चाहे ब्लॉग हो अथवा वेब पत्रिकाएं इस वर्ष ब्लॉगरों के लिए एक ऐसा धोबीघाट रहा ,जहां बैठकर वे अपने घर से लेकर गली-मोहल्ले तक की तमाम मैली चादरों को धोने का काम करते रहे और सुखाते रहे ।

विराम लेने से पहले आपको यह बता दूं कि साल 2011 बहुत लोगों को बहुत कुछ दे कर गया है। लेकिन सबसे खास बात तो उन लोगों के लिए रही जिन्हें इस साल अपना हमसफर मिला। जी हाँ मैं बात कर रहा हूँ युवा ब्लॉगर दीपक मशाल और संजय भास्कर की ...जो इसी वर्ष विवाह के पवित्र बंधन में बंधे।

........विश्लेषण अभी जारी है,फिर मिलते हैं लेकर वर्ष-२०११ की कुछ और झलकियाँ

परिकल्पना सम्मान-२०१०

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