
मंगलवार, 21 मई 2013
क्या आप नहीं जाना चाहेंगे काठमाण्डू ?

यह पहला अवसर है जब हिन्दी चिट्ठाकारों का वैश्विक समागम भारत की दहलीज से बाहर काठमाण्डू में होने जा रहा है ।
साहित्य और ब्लॉगिंग के इस
त्रिदिवसीय महाकुंभ में जहां मेलबोर्न से पधार रहे हैं वरिष्ठ लेखक श्री हरिहर झा, वहीं कनाडा से उपस्थित हो रहे हैं वरिष्ठ ब्लॉगर श्री समीर लाल समीर ।
हिन्दी के वरिष्ठ गजलकार डॉ गिरिराज शरण अग्रवाल और वरिष्ठ लेखिका डॉ मीना अग्रवाल के अतिरिक्त इस वैश्विक समारोह में हैदराबाद से पधार रहे हैं वरिष्ठ कथाकार श्री विजय कुमार सपत्ति और हिन्दी की सुपरिचित लेखिका डॉ रामा द्विवेदी, वाराणसी से प्रसिद्ध विज्ञान कथा लेखक डॉ अरविंद मिश्र तथा बिहार से प्रखर ब्लॉगर श्री मनोज पाण्डेय।
इसके अलावा जयपुर से पधार रहे हैं "अहा जिंदगी" के फीचर संपादक श्री चंडी दत्त शुक्ल, दिल्ली से वरिष्ठ ब्लॉगर एवं व्यंग्यकार श्री अविनाश वाचस्पति, संतोष त्रिवेदी,भोजपुरी फिल्मों के नायक श्री मनोज भावुक, हिन्दी के सुपरिचित रचनाकार श्री मनोज अवोध, सुश्री अंजु अनु चौधरी, नीता कोटेचा, मुकेश कुमार सिन्हा आदि ।
इसके अलावा हिन्दी की साधक सुश्री नमिता राकेश, नीलिमा शर्मा, रश्मि वर्मा, संगीता पुरी, डॉ प्रीत अरोडा आदि ।
इस समारोह में अपनी उपस्थिति की सूचना देने वालों की संख्या 30 तक पहुँच चुकी है और अब आपकी बारी है, समय कम है । अवसर बार-बार नहीं आता, शीघ्र अपना पंजीयन कराएं ।
ध्यान दें : प्रतिभागियों की संभावित संख्या पूर्ण हो जाने पर कभी भी पंजीयन बंद किया जा सकता है ।
() एक खुशखबरी दे दूँ , कि परिकल्पना समय ( मासिक पत्रिका) का लखनऊ से प्रकाशन प्रारम्भ हो गया है, यह रहा उसका प्रवेशांक :
इस पत्रिका के एक अंक की सहयोग राशि है 20/- तथा वार्षिक 240/- , वटवृक्ष के आजीवन सदस्यों को यह पत्रिका आजीवन बिना किसी शुल्क के निरंतर प्राप्त होती रहेगी ।
() चलते-चलते एक और सूचना दे दूँ कि प्रत्येक वर्ष 51 ब्लोगर्स को परिकल्पना सम्मान प्रदान किया जाता रहा है, जिसका निर्वाह इस वर्ष भी किया जाना है, किन्तु उसमें कुछ परिवर्तन किए जा रहे हैं । पहली बार हिन्दी के मंच पर कुछ क्षेत्रीय भाषाओं के ब्लॉगर का भी सम्मान किया जाना है । कुछ वरिष्ठ हिन्दी साहित्यकार व ब्लॉगर को विशेष सम्मान भी दिया जाना है आदि-आदि । इस वर्ष के परिकल्पना सम्मान की उद्घोषणा अगले सप्ताह होने जा रही है, जिन्हें आगामी 13-14 सितंबर में होने वाले अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉग सम्मेलन काठमाण्डू में सम्मानित किया जाएगा ।
उपरोक्त से संवन्धित किसी भी प्रकार का पत्राचार कृपया इस मेल पर ही करें :
शनिवार, 18 मई 2013
किस बात की चर्चा करें आज के परिवेश मेँ ?

आज हरिभूमि के पेज चार पर ........
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हरिभूमि
बृहस्पतिवार, 9 मई 2013
बड़ा बनूंगा, बूढ़ा होकर मैं नहीं मरूंगा (कविता)
मौत को अब तू मनाना सीख ले
बुलाए मौत तुरंत जाना सीख ले
मैं तैयार हूं
आ मौत, कर मेरा सामना
मैं नहीं करूंगा तुझे मना
डर कर नहीं लूंगा नाम तेरा
जानता हूं, मारना ही है काम तेरा
डराना भी तूने अब सीख लिया है
डरना नहीं है, जान ले, काम मेरा
आए लेने तो करियो मौत
पहले तू सलाम
कबूल करूंगा सलाम तेरा, नहीं डरूंगा
भय की भीत पर भी मैं नहीं चढूंगा
बड़ा बनूंगा, आदर करूंगा
अनुभव रचूंगा
सिर्फ बूढ़ा होकर
मैं नहीं मरूंगा
सबकी अच्छाइयों को दूंगा विस्तार
भलाई को सबकी हरदम तैयार
सद्विचारों के साथ शिखर की ओर बढूंगा
ज्ञान को दूंगा सदा सम्मान
अच्छाइयां सबकी अपनाऊंगा मैं
उम्र, रुतवे, जलवे से नहीं
किसी के कभी घबराऊंगा
कौन हूं, क्या होऊंगा और क्या बनूंगा
कर्मों से सदा मैं यह साबित करूंगा
बुराइयां, बदनियतियां सबकी जाहिर करूंगा
नहीं डरूंगा, नहीं डरूंगा, नहीं डरूंगा
न डराऊंगा किसी को कभी
मदद करूंगा, देने पड़े निज प्राण भी
प्राणी हित में सहर्ष अर्पण करूंगा।
कर लिया है तय
डर कर मैं एक बार भी नहीं मरूंगा
मारना चाहेगी तू मुझे मैं तब भी नहीं डरूंगा
मरूंगा, तैयार हूं मरने को
लेकिन जी हुजूरी
कभी नहीं करूंगा
न मौत की
न बीमारी की
न सुखों को काटने वाली आरी की।
दुखों से करूंगा प्यार मैं, यारी करूंगा
लेकिन उधार लेकर नहीं मरूंगा
नियम यह मैंने तय किए हैं
तुझे न हों पसंद
नहीं पड़ता अंतर
जीवंतता से जीने का
यही है मेरा कारगर मंतर।
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बड़ा,
बूढ़ा
बृहस्पतिवार, 2 मई 2013
अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉग सम्मेलन काठमाण्डू में होना तय, चल रहे हैं न आप ?
“न्यू मीडिया और हिंदी का वैश्विक परिदृश्य”
दो दिवसीय
अंतर्राष्ट्रीय परिसंवाद
काठमाण्डू,13-14 सितंबर 2013
(द्वितीय घोषणा)
परिसंवाद स्वरुप :
जैसा कि आप सभी को विदित है कि “न्यू मीडिया और हिंदी का वैश्विक परिदृश्य” विषय पर दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय परिसंवाद का आयोजन 13-14 सितंबर 2013 को काठमाण्डू में किया जा रहा है । यह परिसंवाद चार सत्रों में सम्पन्न
होगा, जिसमें मुख्य प्रतिपाद्य विषय “न्यू मीडिया और हिंदी का वैश्विक परिदृश्य” पर नीचे अंकित उप विषयों पर वैचारिक मंथन सत्रों के साथ ही दो सत्र
उल्लेखनीय ब्लॉगरों के सम्मान और सम्मिलन का भी होगा ।
जो प्रतिभागी इस परिसंवाद में
अपना शोध आलेख प्रस्तुत करना चाहते हैं, उनसे
अनुरोध है कि वे निम्नलिखित विषय सूची से विषय चुनकर संयोजक को parikalpana.samay@gmail.com पर 25 जून 2013 तक भेज दें ।शोधलेख यूनिकोड/मंगल में टंकित करके
वर्ड फ़ॉर्म मे ई मेल द्वारा भेजें। प्राप्त शोध आलेखों का मूल्यांकन एक समिति करेगी और स्वीकृति की सूचना शीघ्र दे दी जायेगी। उक्त के अतिरिक्त पशुपतिनाथ,बोद्धनाथ, स्वयंभूनाथ, दरवार स्क्वायर आदि प्रमुख पर्यटन स्थलों का आधे दिन का दृश्यावलोकन भी समाहित होगा।
आवासीय व्यवस्था :
आवासीय व्यवस्था तीन दिन दो रातों की होगी और इस दौरान प्रतिभागियों
को नाश्ता-खाना और कार्यक्रम स्थल तक जाने -आने हेतु वाहन की समुचित व्यवस्था
सुनिश्चित की जाएगी ।आवासीय एक कमरा तीन लोगों के लिए होगा । पंजीकृत प्रतिभागी
यदि पति-पत्नी हैं तो उन्हें एक कमरा उपलब्ध कराया जाएगा।
उप विषय :
1. हिन्दी ब्लॉगिंग की दशकीय
यात्रा और वर्तमान स्थिति
2. व्यक्तिगत
पत्रकारिता और न्यू मीडिया
3. वेब मीडिया
और हिंदी : एक बिहंगावलोकन
4. हिंदी के
विकास में वेब मीडिया का योगदान
5. भारत में
इन्टरनेट के विकास में क्षेत्रीय भाषाओं की भूमिका
6. वेब मीडिया
और सोश्ल नेटवरकिंग साइट्स
7. वेब मीडिया
और अभिव्यक्ति का लोकतन्त्र
8. वेब मीडिया
और प्रवासी भारतीय
9. हिंदी
ब्लागिंग दिशा, दशा और दृष्टि
10. इंटरनेट जगत
में हिंदी की वर्तमान स्थिति
11. हिंदी भाषा
के विकास से जुड़ी तकनीक और संभावनाएं
12. इन्टरनेट और
हिंदी ; प्रौद्योगिकी सापेक्ष विकास
यात्रा
13. ब्लॉगिंग में
नेपाली भाषा और नेपाल
14. हिंदी
ब्लागिंग पर हो रहे शोध कार्य
15. भारतीय
क्षेत्रीय भाषाओं की वेब पत्रकारिता
16. भारतीय
क्षेत्रीय भाषाओं की ई पत्रिकाएँ
17. हिंदी के
अध्ययन-अध्यापन में इंटरनेट की भूमिका
18. ब्लॉगिंग से
जुड़े महत्वपूर्ण साफ्टव्येर
19. हिंदी टंकण
से जुड़े साफ्टव्येर और संभावनाएं
20. सोश्ल मीडिया
और हमारा समाज
21. सोश्ल
नेटवर्किंग का अभिप्राय और उद्देश्य
22.सोश्ल मीडिया
और अभिव्यक्ति के खतरे
23. न्यू मीडिया
बनाम सरकारी नियंत्रण की पहल
24. वेब मीडिया ; स्व्तंत्रता बनाम स्वछंदता
25. इन्टरनेट और
कापी राइट
26. न्यू मीडिया
और हिंदी साहित्य
27. न्यू मीडिया
पर उपलब्ध हिंदी की पुस्तकें
28. हिंदी, न्यू मीडिया और रोजगार
29. भारत में
इन्टरनेट की दशा और दिशा
30. हिंदी को
विश्व भाषा बनाने में तकनीक और इन्टरनेट का योगदान
31. बदलती भारतीय
शिक्षा पद्धति में इन्टरनेट की भूमिका
32. न्यू मीडिया
में आम आदमी का लोकतन्त्र
33. सामाजिक
न्याय दिलाने में न्यू मीडिया का योगदान
34. भारतीय युवा
पीढ़ी और इन्टरनेट
35. न्यू मीडिया
और दलित विमर्श
36. हिन्दी ब्लॉगिंग और
अभिव्यक्ति की आज़ादी
37. हिन्दी ब्लॉगिंग और समाज का
बदलाव
38. क्षेत्रीय भाषाओं में न्यू
मीडिया की सार्थकता
39. न्यू मीडिया की ई-पत्रिकाएँ
40. भारतीय समाज में सोश्ल
मीडिया की सार्थकता
पंजीकरण :
- पंजीकरण शुल्क – काठमाण्डू / स्थानीय प्रतिभागियों
के लिए 1100/ रूपये
- बाह्य प्रतिभागियों के लिए – 4100/ रूपये है । बाहर से आनेवाले प्रतिभागियों के आवास और भोजन की व्यवस्था आयोजक पूर्व सूचना के आधार पर ही सुनिश्चित करेगा । परिसंवाद का उद्घाटन सत्र 13 सितंबर 2013 को अपराहन 2 बजे शुरू होगा । पंजीकरण एवं जलपान का समय सुबह 9.30 से 11.30 तक रहेगा ।
- पंजीकरण शुल्क यदि चेक या ड्राफ्ट से भेजना चाहते हैं तो उसे "परिकल्पना समय" के नाम और प्येबुल एट लखनऊ बनवाते हुये निम्न पते पर अपने वायोडाटा और आलेख के साथ भेज दें :
- पता इसप्रकार है : परिकल्पना समय,एस एस-107, संगम होटल के पीछे,अलीगंज, लखनऊ-226024 (उ. प्र.)
इस परिसंवाद से जुड़ी कुछ बातों को स्पष्ट करना चाहूँगा,जो अधिकांश प्रतिभागी फोन और पत्र द्वारा जानना चाहते हैं ।
- इस अंतर्राष्ट्रीय परिसंवाद में सहभागी हो रहे किसी भी प्रतिभागी को किसी प्रकार का यात्रा व्यय हम प्रदान नहीं करेंगे ।
- प्रपत्र प्रस्तुत करेने के लिए भी कोई मानधन हम प्रदान नहीं करेंगे ।
- काठमाण्डू के बाहर से आनेवाले प्रतिभागियों को अपना पंजीकरण 13 अगस्त के पूर्व सुनिश्चित करना होगा।
- काठमाण्डू के बाहर से आनेवाले प्रतिभागियों का सेमिनार के दिन पंजीकरण नहीं किया जाएगा और ना ही उन्हे परिसंवाद में सम्मिलित होने की अनुमति दी जाएगी ।
- प्रकाशित होने वाली पुस्तक अथवा विशेषांक में सभी प्रतिभागियों के आलेख सम्मिलित नहीं किए जाएंगे ।
- आप के आलेख को छापने या न छापने के निर्णय को लेने के लिए परिकल्पना समय स्वतंत्र है ।
- आवास की व्यवस्था 13-14 सितंबर 2013 और 15 सितंबर की सुबह 10 बजे तक के लिए ही है और सिर्फ पूर्व पंजीकृत प्रतिभागियों के लिए ।
- प्रतिभागियों को परिसंवाद के अतिरिक्त नान ए सी डीलक्स कोच से आधे दिन का दृष्यवलोकन भी कराया जाएगा, जिसमे पशुपतिनाथ,बोद्धनाथ, स्वयंभूनाथ, दरवार स्क्वायर आदि होंगे ।
- इन सभी स्थानों पर प्रवेश शुल्क प्रतिभागियों को स्वयं वहन करना होगा ।
ब्लागिंग
के इस स्वर्णिम पड़ाव पर सहभागी बनने को आप आमंत्रित हैं!
सोमवार, 22 अप्रैल 2013
अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉग सम्मेलन काठमाण्डू में क्यों ?
पिछले पोस्ट में यह उदघोषणा हुयी थी,कि इसबार अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉग सम्मेलन और परिकल्पना सम्मान समारोह काठमाण्डू में ही आयोजित किए जाएँगे । तो चलिये काठमाण्डू ( काठमाण्डु या काठमाडौं ) चलने की तैयारी करते हैं,किन्तु एक दिवसीय आयोजन में नहीं, बल्कि तीन दिवसीय सम्मेलन में ।दूरभाष पर कमेटी मेम्बर से तथा नेपाल के व्यवस्थापक से हुई वार्तानुसार यह तय किया गया है कि यह सम्मेलन हिन्दी दिवस पर यानि 13-14-15 सितंबर 2013 में होंगे ।
आपके मन में यह जिज्ञासा होगी कि इसबार यह सम्मेलन -
काठमाण्डू ( काठमाण्डु या काठमाडौं) में ही क्यों ?
दरअसल बात ऐसी है कि इस साल हिन्दी ब्लॉगजगत दस वर्ष की अवधि को पार करके ग्यारहवें वर्ष में प्रवेश कर गया है । इसलिए परिकल्पना सम्मान के अंतर्गत हम हिन्दी के साथ-साथ दस क्षेत्रीय भाषाओं के ब्लॉगर को भी सम्मानित करने जा रहे है, जिसमें से एक नेपाली भाषा भी है । नेपाली भाषा का स्त्रोत मूल रूप से नेपाल में ही है, किन्तु हमारे लिए यह सौभाग्य का विषय है कि यह भाषा भारतीय संबिधान की आठवीं अनुसूची में दर्ज भारत की एक महत्वपूर्ण क्षेत्रीय भाषा भी है । भारत में इस भाषा का साहित्य अत्यंत समृद्ध है।
जैसा कि आप सभी जानते हैं कि नेपाल की राजधानी काठमांडू खूबसूरती और शांति का अनूठा संगम है। काठमांडू नेपाल का सबसे बड़ा अन्तर्राष्ट्रीय शहर है जहां सैलानियों का सबसे ज्यादा आगमन होता है। पहाड़ियों से घिरे इस खूबसूरत शहर को यूनेस्को की विश्वदाय धरोहरों में शामिल किया गया है।यहां की रंगीन संस्कृति और परंपराओं के अलावा विशिष्ट शैली में बने शानदार घर सैलानियों को अनायास ही अपनी और आकर्षिक कर लेते हैं। यहां के शानदार मंदिर पूरी दुनिया में अपनी अलग पहचान रखते हैं।
साथ ही यहां के प्राचीन बाजारों की रौनक भी देखते ही बनती है। इसलिए सोचा गया कि सम्मान-समारोह के अतिरिक्त एक दिन ब्लॉगरों के मिलने-मिलाने, पढ़ने-पढ़ाने का कार्यक्रम और एक दिन पर्यटन का भी लाभ मिले ऐसी व्यवस्था की जाए। 28 अप्रैल 2013 को लखनऊ में परिकल्पना समारोह की कोर कमेटी की बैठक होने जा रही है,जिसके पश्चात कार्यक्रम का विस्तृत व्योरा प्रस्तुत किया जायेगा ।
ई-मेल आई डी : parikalpana.samay@gmail.com
आपके जेहन में एक बात और कौंध गयी होगी, कि यह परिकल्पना समय क्या है ?
यदि विनय जैन के द्वारा 19 अक्टूबर 2002 को अंगे्रजी ब्लाग पर हिन्दी की कड़ी सर्वप्रथम आरंभ करने के आगाज को छोड़ दिया जाये तो प्रामाणिक तौर पर हिन्दी में ब्लागिंग आरंभ करने का श्रेय आलोक कुमार को जाता है, जिन्होने 21 अप्रैल 2003 में हिन्दी के पहले ब्लॉग "नौ दो ग्यारह" की शुरुआत की थी । इसप्रकार कल हिन्दी ब्लॉग जगत ने दस वर्ष पूरा कर लिया और आज ग्यारहवें वर्ष में प्रवेश कर गया है ।
इस महत्वपूर्ण अवसर पर परिकल्पना समूह ने एक नयी पत्रिका "परिकल्पना समय" के मासिक प्रकाशन का संकल्प लिया है । एक-दो दिन में इसकी कानूनी प्रक्रिया पूरी हो जाएगी । इस पत्रिका का प्रकाशन मई 2013 से प्रारंभ हो जाएगा ।
कार्यक्रम से संबन्धित किसी भी प्रकार का पत्र व्यवहार कृपया उपरोक्त ई मेल संपर्क पर ही करें - यदि इस कार्यक्रम के आयोजन से संबन्धित आपके कोई सुझाव हो तो नि:संकोच टिप्पणी बॉक्स में दर्ज करें । आपके सुझाव पर अवश्य अमल किया जाएगा ।
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बृहस्पतिवार, 18 अप्रैल 2013
हम सुनहरे भविष्य की ओर बढ़ रहे हैं...... ?
संतोष त्रिवेदी जी ने लिखा था कि "डायचे-वेले के ब्लॉगिंग सम्मान को लेकर कुछ लोग इत्ते उतावले हो रहे हैं कि चार लोगों के सहयोग से जर्मनी जाने से परहेज नहीं है। हमने तो अभी तक यही सुना था कि अंत समय में ही चार कांधों की ज़रूरत होती है .....!"
जैसे ही डायचे-वेले का प्रकरण आया है, मुझसे मेरे एक ब्लॉगर मित्र ने पूछा कि भैया जर्मनी तो कोई एक ही जाएगा न .... आप में इक्यावन लोगों की गुंजाइश है .....कब कर रहे हैं परिकल्पना सम्मान की घोषणा ?
मैंने कहा- भाई कहाँ डायचे-वेले का अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार और कहाँ दो कौरी की परिकल्पना, सम्मान लेने के लिए भला अब कोई ब्लॉगर लखनऊ क्यों आयेगा ? जर्मनी क्यों नहीं जाएगा ?
मैंने तो सोचा था कि इस बार यदि कोई याद नहीं दिलाया तो सो जाऊंगा लंबी चादर तानकर, लेकिन क्या करूँ यह ब्लॉगजगत न तो ठीक से जगाने देता है और न ही सोने ही देता है । इतना कहना था कि उस ब्लॉग पंडित ने कृष्ण की तरह मेरे पुरुषार्थ को ललकारते हुये श्लोक ही बाँच डाला कि " उद्यमेन हि सिद्धयंति कार्याणि न मनोरथे: । नहिं सुप्तस्य सिंहस्य प्रविशन्ति मुखे मृग : ॥"
फिर उन्होने मुझे समझाया कि ऐसे समय में जब हिन्दी ब्लॉगजगत का पूरा कुनबा "डायचे-वेले ब्लॉग फिक्सिंग" की खबरों को चटखारे लेकर सुनने मे व्यस्त है, धीरे से परिकल्पना सम्मान (तृतीय) के 51 नामितों की घोषणा कर ही दिया जाये। क्या पता पिछले वर्ष की तरह फिर कोई डिस्क्लेमर की नज़र लग जाये । अब भला किस-किस पर आप मुकदमा करते फिरोगे ? किस-किसको गला फाड़के स्पष्टीकरण देते फिरोगे भला ?
इतना सुनने के बाद मुर्दा भी उठकर खड़ा हो जाये, मैं तो भला जीवित जीव हूँ । मैंने कहा मित्र पिछली बार एक सज्जन ने यह कहकर उंगली उठाई थी कि दिल्ली और लखनऊ में होने वाले सम्मेलन अंतर्राष्ट्रीय कैसे हो गए ?
उनका आशय था कि भारत से बाहर होने वाला सम्मेलन ही अंतर्राष्ट्रीय होता है, इसलिए मैं इसबार कार्यक्रम दिल्ली, लखनऊ के बाद अब पटना या भोपाल में नहीं करूंगा ।
तो कहाँ करेंगे ? उन्होने भारी मन से पूछा । मैंने कहा विदेश में । इसपर उन्होने कहा "तब तो पासपोर्ट और वीजा का चक्कर लगेगा ?"
मैंने कहा उसकी जरूरत नहीं, क्योंकि काठमाण्डू के लिए पासपोर्ट और वीजा की जरूरत नहीं होती। काठमाण्डू का नाम सुनते ही उनके चेहरे खिल गए और मुस्कुराकर कहा "हाँ यह ठीक है ।''
तो चलिये काठमाण्डू चलने की तैयारी करते हैं, लेकिन इसबार एक दिवसीय नहीं, बल्कि तीन दिवसीय सम्मेलन में ।
इसके लिए एक सप्ताह के भीतर कमेटी मेम्बर की बैठक लखनऊ में होगी और 51 पुरस्कारों की घोषणा के साथ तय कार्यक्रमों को सार्वजनिक कर दिया जाएगा ।
क्या आप तैयार हैं काठमाण्डू चलने के लिए ?
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नई दिल्ली से सुषमा सिंह की एक विस्तृत रपट रविवार दिनांक 8 मई 2011 के दैनिक जनसंदेश टाइम्स, लखनऊ में पेज 19 पर प्रकाशित।


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